लाठीचार्ज के विरोध में गैरसैंण से लेकर देहरादून और कुमाऊं में भी उबाल बना हुआ है। कई संगठनों ने मंगलवार को जगह-जगह प्रदर्शन किए। कई जगह सरकार का पुतला दहन किया गया।
देहरादून में एनएसयूआई छात्र संगठन के सदस्यों ने डीएवी कॉलेज के गेट के सामने राज्य सरकार का पुतला दहन किया। वहीं, उत्तराखंड महिला मंच के सदस्यों ने डीएम कार्यालय में प्रदर्शन कर जोरदार नारेबाजी की।
उधर, हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में में भी यूकेडी कार्यकर्ताओं ने लाठीचार्ज का विरोध किया और सरकार का पुतला दहन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज से यह साफ हो गया है कि प्रदेश सरकार दमन की नीति पर विश्वास करती है। कांग्रेस इस मामले को सदन में भी उठाएगी और सदन के बाहर भी इसका पुरजोर विरोध करेगी।
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नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने कहा कि आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज करवा कर सरकार ने अपना जनविरोधी रुख सामने रख दिया है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक उठाया जाएगा। सड़क पर विरोध जताया जाएगा और लोगों के सामने सही स्थिति रखी जाएगी।
वहीं, मालकोट-सेरा-तेवाखर्क सड़क निर्माण संघर्ष समिति के करीब 50 लोगों ने प्रमुख लोनिवि के अभियंता से मुलाकात की। वहां जब उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उसके बाद उन्होंने भराड़ीसैंण के लिए कूच किया, लेकिन दुखथमा बैरियर पर पुलिस ने उन्हें रोक दिया। कुछ देर बाद नारेबाजी करने के बाद वे वापस चले गए।
नंदप्रयाग-घाट मोटर मार्ग के चौड़ीकरण की मांग को लेकर प्रदर्शनकारियों पर सोमवार को हुए लाठीचार्ज के विरोध में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने दिवालीखाल तिराहे पर धरना-प्रदर्शन किया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भी राज्य कर्मचारी घोषित करने, 21 हजा रुपये मानदेय देने समेत अन्य मांगों को लेकर कालीमाटी के पास दुखथमा बैरियर पर धरना दिया और सरकार के खिलाफ में नारेबाजी की।
ग्रीष्मकालीन राजधानी में बजट सत्र के दूसरे दिन विपक्ष ने सूझबूझ से सरकार की घेराबंदी की। सत्ता पक्ष आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज के मामले में जवाब देने की तैयारी करता रह गया और विपक्ष ने महंगाई के मुद्दे पर सरकार को उलझा दिया। इस मुद्दे पर सरकार को घेरने के बाद ही विपक्ष ने लाठीचार्ज के मुद्दे को उठाया।
सोमवार को दिवालीखाल में घाट-नंदप्रयाग सड़क निर्माण की मांग कर रहे आंदोलनकारियों पर पुलिस ने लाठियां भांजीं थीं। शाम होते-होते मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस मामले में मजिस्ट्रेट जांच के आदेश भी जारी कर दिए थे। ट्रेजरी बैंच को उम्मीद थी कि इस मुद्दे पर सदन में मंगलवार को विपक्ष का रुख आक्रामक रहेगा। इसी को देखते हुए संसदीय कार्य मंत्री मदन कौशिक की ओर से जवाब भी तैयार किया गया था।
कांग्रेस ने इसे भांपते हुए सदन में महंगाई के मुद्दे को काम रोको प्रस्ताव के तहत उठाया। विपक्ष ने रणनीतिक सूझ बूझ के तहत प्रश्नकाल और शून्यकाल चलने दिया और इसके बाद महंगाई के मुद्दे पर सरकार को घेर लिया। इस पर सरकार का जवाब आता, इससे पहले ही विपक्ष सदन से बहिर्गमन कर गया। इसके बाद ही सदन में कांग्रेस ने लाठीचार्ज का मुद्दा उठाया और सरकार पर तीखा हमला बोला। इसमें भी खासे हंगामे के बाद सदन से विपक्ष ने बहिर्गमन किया।
संसदीय कार्यमंत्री ने भी दिखाई सूझबूझ
संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक शुुरू में विपक्ष की रणनीति को भांपने में चूक गए, लेकिन बाद में उन्होंने भी मामले को संभाल लिया। मदन कौशिक की सफलता रही कि काम रोको प्रस्ताव और दो बड़े मुद्दे होने के बाद भी सदन में राज्यपाल के अभिभाषण पर समय से चर्चा शुरू हुई और प्रश्नकाल भी सुचारू रूप से चला। वहीं, विपक्ष की ओर से नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने साफ कहा कि प्रश्नकाल और शून्यकाल को चलने देना विपक्ष ने तय किया था। लिहाजा सरकार इसमें अपनी पीठ न थपथपाए।