इस्तीफे की जानकारी देते हुए भावुक अध्यक्ष एस राजू
इस्तीफे की जानकारी देते हुए उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष एस राजू कई बार भावुक हो गए। अपने ऊपर उठ रहे सवालों से आहत राजू ने कहा, मुझे यह सब अच्छा नहीं लगा।
उत्तराखंड सरकार में लंबे समय तक बतौर आईएएस अपनी सेवाएं दे चुके एस राजू शुक्रवार को इस्तीफा देते हुए अपने आंसू नहीं रोक पाए। वह एक ओर जहां अपने ऊपर उठ रहे सवालों से आहत हैं तो दूसरी ओर पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत के आयोग को भंग करने के बयान से भी दुखी हैं। उन्होंने कहा कि ब्लूटूथ से पेपर लीक का पटाक्षेप करने पर जिस मुख्यमंत्री ने उनकी पीठ थपथपाई थी, आज ऐसा बयान देने से पहले उन्होंने एक बार भी आयोग का पक्ष जानने की कोशिश नहीं की। कहा कि वह व्यक्तिगत तौर पर उनसे इस संबंध में बात करेंगे।
उन्होंने कहा कि तमाम नेताओं के दबाव और सिफारिशें आईं लेकिन उन्होंने कभी भर्तियों में कोई समझौता नहीं किया। आयोग कितना पारदर्शी है, इसकी जानकारी उनसे लेनी चाहिए, जिन्हें नौकरी मिल चुकी है। बोले कि उनका कभी किसी नेता से कोई नाता नहीं रहा। अगर कोई अब उनके चरित्र पर सवाल उठा रहा है तो वह इसे महसूस कर रहे हैं। आंसुओं को काबू करते हुए बोले कि उन्हें यह सब अच्छा नहीं लगा। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ नकल माफिया आयोग के अधिकारियों को जबर्दस्ती टारगेट कर रहे हैं।
स्नातक स्तरीय परीक्षा में पेपर लीक के बीच विदा हुए अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष एस राजू जाते-जाते नकल माफियाओं पर नकेल कस गए। आयोग ने नकलरोधी कानून का प्रस्ताव पास कर शासन को भेज दिया है। अब सरकार को इस पर निर्णय लेना है।
स्नातक स्तरीय परीक्षा में पेपर लीक प्रकरण में साइबर सेल की रिपोर्ट आने के बाद आयोग ने हाल ही में नए नकलरोधी कानून का प्रस्ताव पास किया है। इस कानून में नकल माफियाओं के लिए सख्त सजा के प्रावधान किए गए हैं। यह प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। इसमें नकल व पेपर लीक या परीक्षा में अनुचित साधनों का प्रयोग करने पर परीक्षार्थी को पांच साल तक का कारावास, कम से कम एक लाख रुपये जुर्माना और दस साल तक के लिए परीक्षाओं से प्रतिबंधित करने का प्रावधान किया गया है।
वहीं, सेवा प्रदाता, शिक्षण संस्थान, परीक्षा संस्था या अन्य की ओर से सांठगांठ कर अनुचित साधनों का प्रयोग करने पर दस साल की जेल, दस करोड़ रुपये तक जुर्माना, सार्वजनिक परीक्षा से अर्जित की गई संपत्ति की कुर्की और परीक्षा की पूरी लागत की वसूली का प्रावधान किया गया है। आयोग के अध्यक्ष एस राजू ने बताया कि यह प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। अब सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की सभी परीक्षाओं में यह लागू हो जाएगा।
गड़बड़ी रोकने को दो स्तर की परीक्षा
आयोग ने एस राजू की अध्यक्षता में यह भी फैसला लिया है कि परीक्षा को द्विस्तरीय बनाया जाएगा। पहले प्रारंभिक परीक्षा होगी और इसके बाद मुख्य परीक्षा होगी। प्रारंभिक परीक्षा ऑनलाइन और मुख्य परीक्षा ऑफलाइन होगी। चूंकि नकल संबंधी नियमों पर निर्णय राज्य सरकार का विषय है, इसलिए यह प्रस्ताव भी सरकार को भेज दिया गया है।