कुछ गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित होने का जोश और कुछ मौसम की बेरुखी ही रही कि सरकार पांच दिन के सत्र में केवल एक तिहाई ही काम कर पाई। हाल यह रहा कि पांच दिन के सत्र में करीब 22 घंटे तक ही चर्चा, बजट पेश करना, विधेयक पास कराना और प्रश्न काल, शून्यकाल की कार्यवाही हो पाई।
विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने बताया कि सदन की कार्यवाही केवल 22 घंटे और 36 मिनट तक चली। भराड़ीसैंण में एक दिन सभी तारांकित सवालों का जवाब सदन में आने का रिकार्ड भी बना था। ऐसा प्रदेश की विधानसभा में 18वीं बार हुआ।
इसके बाद भी हाल यह रहा कि स्वीकार किए गए 241 सवालोें में से मात्र 36 सवालों का ही जवाब आया। सरकार ने इन पांच दिनों में नौ विधेयक पास कराए और करीब 53 हजार करोड़ रुपये का बजट सदन के पटल पर पेश किया। सदन में विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों से भी जाहिर है कि भराड़ीसैंण में सत्र आयोजित कराने में सरकार सहज नहीं रही। नेटवर्क न होने से मंत्रियों और विधायकों को तो परेशानी हुई ही। इसके साथ ही व्यवस्था के सवाल पर पहले ही दिन सुरेंद्र सिंह जीना का पारा भी गरम हो गया था।
सदन स्थगित होने से पहले ही सत्ता पक्ष के सभी मंत्रियों और अधिकतर विधायकों के गायब होने से यह भी जाहिर हुआ कि बर्फबारी के साथ ही नेटवर्क की कमी ने सरकार को असहज किया। पांच दिन के सत्र में मुख्यमंत्री ने चार मार्च को गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया था। इससे आगे के दिन सरकार ने इसी घोषणा के सहारे काटे। राज्यपाल के अभिभाषण और बजट पर चर्चा में बार-बार ग्रीष्मकालीन राजधानी का जिक्र आया।