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UKSSSC: नौ महीने में शासन तय ही नहीं कर पाया अफसर को क्यों किया निलंबित, आयोग के सचिव बडोनी हुए थे सस्पेंड

Thu, 15 Jun 2023 02:16 PM IST
रेनू सकलानी अमर उजाला, न्यूज डेस्क, देहरादून

सार

सरकार ने पिछले साल दो सितंबर को संतोष बडोनी को सस्पेंड कर दिया था। उनकी जगह आयोग में नए सचिव की तैनाती कर दी गई थी। बडोनी तब से लगातार सस्पेंड चल रहे हैं। सचिवालय सेवा के अफसर होने के नाते सचिवालय प्रशासन को उन्हें आरोप पत्र देना चाहिए लेकिन सचिवालय प्रशासन को पता ही नहीं है कि आरोप क्या हैं।
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यूकेएसएससी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के पूर्व सचिव संतोष बडोनी को पेपर लीक प्रकरण के दौरान सस्पेंड तो कर दिया गया, लेकिन नौ माह बीत गए और शासन तय ही नहीं कर पाया कि उन्हें निलंबित क्यों किया। हाल ये है कि निलंबित अफसर को आरोप पत्र देने की अधिकतम सीमा तीन माह है लेकिन नौ माह में सचिवालय प्रशासन व कार्मिक विभाग एक-दूसरे पर टाल रहे हैं।

दरअसल, आयोग के पेपर लीक प्रकरण के बीच सरकार ने पिछले साल दो सितंबर को संतोष बडोनी को सस्पेंड कर दिया था। उनकी जगह आयोग में नए सचिव की तैनाती कर दी गई थी। बडोनी तब से लगातार सस्पेंड चल रहे हैं। सचिवालय सेवा के अफसर होने के नाते सचिवालय प्रशासन को उन्हें आरोप पत्र देना चाहिए लेकिन सचिवालय प्रशासन को पता ही नहीं है कि आरोप क्या हैं।

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मामले में दोनों विभागों के अफसर खामोश
सचिवालय प्रशासन ने आरोपों की जानकारी के लिए कार्मिक विभाग को पत्र भेजा लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। जानकारी के मुताबिक, सचिवालय प्रशासन इसका रिमांइडर भी भेज चुका है। बावजूद इसके कार्मिक विभाग ने कोई जवाब नहीं दिया। दो विभागों के बीच चल रही इस हीलाहवाली की वजह से एक अफसर सस्पेंड है। नियमानुसार कार्मिक को सस्पेंड होने के अधिकतम तीन माह के भीतर आरोप पत्र देना चाहिए लेकिन यहां नौ माह का समय हो चुका है। मामले में दोनों विभागों के अफसर खामोश हैं।

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विजिलेंस जांच में भी नहीं मिला था आधार

संतोष बडोनी की विजिलेंस ने भी जांच की थी। जांच रिपोर्ट जब शासन को भेजी गई तो शासन ने यह कहते हुए कार्रवाई से इंकार कर दिया था कि बडोनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का पुख्ता आधार नहीं है। इसके बाद विजिलेंस मामले की जांच का दावा कर रही है।
 

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