2020 में वीआरएस ले लिया था
हालांकि कई तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है। डॉ. राकेश कुमार उत्तराखंड कैडर के 1992 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वह अविभाजित उत्तर प्रदेश में सिद्धार्थ नगर और उत्तराखंड में पौड़ी, नैनीताल व देहरादून के डीएम के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। 2020 में उन्होंने वीआरएस ले लिया था। इसके बाद सरकार ने उन्हें आयोग की जिम्मेदारी सौंपी थी।
ये रहीं उपलब्धियां
- भर्तियों का वार्षिक कैलेंडर तैयार कराया।
- 30 परीक्षाएं आयोजित कर परिणाम जारी कराए।
- कर्मियों की समय से पदोन्नति को डीपीसी बैठकों के लिए सचिवालय में ही व्यवस्था।
- 110 डीपीसी कराई, इसके बाद एक भी डीपीसी लंबित नहीं बची।
- साक्षात्कार में कोड प्रणाली लागू की। विषय विशेषज्ञों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ई-पोर्टल लांच कराया।
- कई विभागों में समान प्रकृति के पदों के लिए सम्मिलित परीक्षा का आयोजन सुनिश्चित कराया।
- तेजी से भर्तियां करने के लिए इलेक्शन मोड में परीक्षाओं का आयोजन कराया।
- परीक्षाओं की शुचिता के मद्देनजर डबल लेयर सिक्योरिटी सिस्टम सुनिश्चित किया।
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आयोग के दामन पर लगा पेपर लीक का दाग
डॉ. राकेश कुमार के कार्यकाल में उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षाओं के पेपर पहली बार लीक हुए। आयोग के अनुभाग अधिकारी ने पटवारी-लेखपाल भर्ती का पेपर लीक किया। इससे आयोग असहज हो गया। उससे पूछताछ के बाद पुलिस ने एई भर्ती और जेई भर्ती में भी पेपर लीक की पुष्टि की। तीनों परीक्षाओं को आयोग ने तत्काल रद्द कर दिया, लेकिन पहली बार आयोग के दामन पर पेपर लीक का दाग लग गया।