अलका ने अपने घर पर तो मुरादाबाद जाने की बात कही थी लेकिन वह दो दिन तक जोगेंद्र के साथ काशीपुर और आसपास के क्षेत्रों में ही थी। जोगेंद्र उसे लेकर केलाखेड़ा, बन्नाखेड़ा और बैलपड़ाव भी गया। नकदी और जेवर लेकर वह अलका को घर भेजना चाहता था लेकिन घर लौटने को राजी नहीं थी। माल हड़पने की नीयत से जोगेंद्र ने पुलिया के पास स्कूटी रोकी और मुंह दबाकर अलका की हत्या कर शव नीचे फेंक दिया।
अलका ने बैंक से लिया था गोल्ड लोन
जोगेंद्र से पुलिस को मात्र 18 तोला सोना मिला है जबकि अलका के परिजन 50 तोले से अधिक सोना ले जाने की बात कह रहे हैं। जांच में सामने आया कि अलका ने चार तोले वजन की सोने की चूड़ियां आईसीआईसीआई बैंक रामपुर में गिरवी रखकर लोन लिया था। वहीं, पुलिस को हीरे के 21 नग, तीन खातों के एटीएम कार्ड, बीमा पॉलिसी, आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज बरामद नहीं हो सके। आरोपी ने उक्त सामान कुंडा क्षेत्र के एक नाले में फेंकने की बात कही। नाले की खोजबीन में भी पुलिस को कुछ नहीं मिला। शेष बरामदगी के लिए पुलिस आरोपी को रिमांड पर ले सकती है।
कई जिलों में फैला था जोगेंद्र का नेटवर्क
जोगेंद्र इलाज के बहाने लोगों को सम्मोहित कर उनसे मोटी रकम ऐंठता था। मुरादाबाद, बिजनौर, ऊधमसिंह नगर, रामपुर, संभल तक उसका जाल फैला था। ऊपरी साये, वशीकरण आदि से पीड़ित लोगों के इलाज को उसने कुंडेश्वरी के भीमनगर, डिलारी के ग्राम अमविया और कुंडा के ग्राम किलावली में ठिकाने बनाए थे। उसका गुरु किलावली में रहता है। बड़ा संकट होने पर वह मरीजों को कई तीर्थों में भी ले जाता था। वह अब तक सैकड़ों लोगों को ठग चुका है। ठगी का खुलासा होने पर ही उसने अलका का मकान छोड़ा। श्यामपुरम के लोगों ने भी उसके खिलाफ आईटीआई थाने में तहरीर सौंपी थी।