एसपी देहात के अनुसार, नईम ने पूछताछ में बताया कि वर्ष 2012 में ग्राम प्रधान कमरे आलम के भाई मुजम्मिल की हत्या में आबिद जेल गया था। जेल में आबिद की वसीम से मुलाकात हुई थी। कुछ दिनों बाद वसीम जेल से छूट गया। एक लूट के मामले में वह फिर जेल गया। यहां वसीम की मुलाकात मुनीर निवासी देवबंद से हुई थी। 2019 में आबिद जमानत पर बाहर आ गया था। वसीम और मुनीर भी जमानत पर बाहर आ गए। इसके बाद आबिद ने ग्राम प्रधान की हत्या के लिए वसीम और मुनीर को दस लाख की सुपारी दी थी। वसीम ने अपने भाई नईम और सलमान को भी हत्या की योजना बताई।
12 दिसंबर को वसीम और नईम बाइक से रामपुर चुंगी आए और आबिद के जीजा मुनीर और दिल्ली निवासी फरहान से मिले। मुनीर ने बताया कि आबिद के भाई आशिक ने फरहान को दिल्ली से भेजा है। वह प्रधान को जानता है और उन्हें उसकी शक्ल दिखाएगा। साथ ही दिलशाद निवासी मदीना कॉलोनी, मुजफ्फरनगर हाल रामपुर चुंगी को भी वसीम से मिलवाया। उसने वसीम को प्रधान की शक्ल दिखाई और सभी वापस लौट गए। यहां फरहान ने वसीम को एक लाख रुपये एडवांस भी दिए।
20 दिसंबर का दिन हुआ तय
एसपी देहात ने बताया कि ग्राम प्रधान की हत्या के लिए 20 दिसंबर का दिन तय किया गया था। उस दिन वसीम, दिलशाद और नईम ने ग्राम प्रधान की रेकी की। इसके बाद तीनों रामनगर कोर्ट के बाहर प्रधान का इंतजार करने लगे। कोर्ट से बाहर आने पर नईम ने 32 बोर के पिस्टल से ग्राम प्रधान को गोली मार दी और दिलशाद के साथ बाइक पर बैठकर फरार हो गया। इसके बाद वसीम, नईम और दिलशाद रामपुर चुंगी स्थित कमरे पर पहुंचे। यहां बाइक खड़ी करने के बाद वसीम और नईम शामली गए। इसके बाद वसीम अपनी पत्नी शाम, नईम और सलमान के साथ टैक्सी कर आबिद के भाई आशिक से नौ लाख रुपये लेने पानीपत पहुंचे। यहां आशिक, मुनीर और फरहान ने उसे नौ लाख रुपये दे दिए।
नईम की निशानदेही पर पिस्टल बरामद
एसपी देहात ने बताया कि नईम की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त 32 बोर का पिस्टल, दो कारतूस और बाइक बरामद की है। वसीम पर मुजफ्फरनगर में हत्या लूट और डकैती के करीब 30 केस दर्ज हैं। वसीम और नईम पेशेवर शूटर भी हैं। लूट के मामले में वसीम वेस्ट यूपी पुलिस से मुठभेड़ में घायल भी हो गया था।