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Dehradun News: डायलिसिस मरीजों को असंतुलित आहार से जान का खतरा

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डायलिसिस के मरीजों के लिए असंतुलित आहार जान का खतरा पैदा कर सकता है। इसके लिए दून अस्पताल में डायलिसिस करा रहे मरीजों के लिए विशेष डायट प्लान जारी किया गया है। अब यह प्लान बारी-बारी से सभी मरीजों को दिया जाएगा ताकि लोग इसी के अनुसार अपना आहार लेकर सुरक्षित इलाज करा सकें। चिकित्सकों के मुताबिक किडनी के 85 से 90 प्रतिशत तक खराब होने के बाद मरीजों को डायलिसिस कराने की जरूरत पड़ती है। ऐसी स्थिति में किडनी अस्थायी रूप से काम करना बंद कर देती है। ऐसे में इन मरीजों की जान की सुरक्षा करने में विशेष आहार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डायलिसिस कराने वाले मरीजों के शरीर में कई अपशिष्ट और तरल की मात्रा संतुलित होना बेहद जरूरी है। अगर इसके मापदंडों में उतार-चढ़ाव आता है तो यह जान का खतरा भी पैदा कर सकता है। दून अस्पताल में डायलिसिस करवा रहे कई मरीजों में इस तरह की समस्या देखी गई थी। इतना ही नहीं एक मरीज ने इस संबंध में डायलिसिस यूनिट प्रबंधन से शिकायत कर प्रामाणिक आहार विशेषज्ञ से डायलिसिस के मरीजों के लिए विशेष डायट चार्ट बनाने की मांग की थी। इस पर यूनिट प्रबंधन के अधिकारियों ने आहार विशेषज्ञ के साथ लंबी चर्चा के बाद डायट प्लान तैयार किया है। अस्पताल की डायलिसिस यूनिट के प्रभारी और वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. हरीश बसेरा ने बताया कि जिन मरीजों की किडनी खराब हो जाती है, उनके रक्त में अपशिष्ट बनने लगते हैं। साथ ही कई तरह के तरल पदार्थ जमा हो जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से नाइट्रोजन अपशिष्ट शामिल हैं। इसके अलावा अम्ल और इलेक्ट्रोलाइट्स युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करने से शरीर में पोटेशियम की मात्रा बढ़ने लगती है। यह समस्या असंतुलित डायट ग्रहण करने से आती है। ऐसे में इन मरीजों के लिए समय पर डायलिसिस करवाने के साथ ही चिकित्सकीय सलाह के अनुरूप डायट लेना जरूरी है। चिकित्सकों के अनुसार नॉनवेज, खट्टे फल व सब्जियां, पत्ते वाली सब्जियां का सेवन नहीं करना है। इससे रक्त में अपशिष्ट असंतुलित हो जाते हैं। संवाद
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