इसी महीने विभाग ने इस पर आपत्तियों की सूचना जारी कर दी। दो माह के भीतर इस पर आपत्तियां व सुझाव मांगे गए हैं, जिसका विश्लेषण करने के बाद अंतिम अधिसूचना जारी हो जाएगी। एएसआई के देहरादून सर्कल के अधीक्षण पुरातत्वविद् मनोज कुमार सक्सेना ने कहा कि चूंकि अभी इस मंदिर का प्राथमिक अध्ययन उनकी टीम ने किया था, जिसमें यह स्पष्ट हुआ था कि मंदिर के कुंड व कुछ अन्य हिस्से अपने स्थान से खिसक रहे हैं। उधर, बदरी केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय का कहना है कि मंदिर के संरक्षण में वह सक्षम है। लिहाजा, संरक्षण की अधिसूचना पर मंदिर समिति कड़ा विरोध जताएगी।
पंच केदार में से एक है तुंगनाथ
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में समुद्रतल से 3460 मीटर की ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ मंदिर पंच केदार में से एक है। इसे तृतीय केदार माना गया है। पौराणिक मान्यता है कि पांडवों ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए इस मंदिर का निर्माण किया था। तुंगनाथ को दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर माना जाता है, जिसे 8वीं शताब्दी में कत्यूरी शासकों ने बनवाया था।