देहरादून। गढ़ी कैंट स्थित गोरखाली सुधार सभा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह प्रसंग की लीला का वर्णन किया गया। कथाव्यास नारायण प्रसाद आचार्य ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का विवाह केवल एक वैवाहिक प्रसंग नहीं, बल्कि भक्ति, समर्पण, विश्वास और ईश्वर के प्रति अटूट प्रेम का दिव्य प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को सदैव भगवान के प्रति श्रद्धा, विश्वास और भक्ति बनाए रखनी चाहिए, क्योंकि सच्ची भक्ति ही जीवन को सफल व सार्थक बनाती है। इस अवसर पर पंडित मधुसूदन ज्ञवाली, हरिहर गौतम, दुर्गेश गौतम आदि मौजूद रहे।