अमर उजाला दून स्टूडियो में अस्मिता।
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राजधानी देहरादून में रह रहीं अस्मिता भले ही गढ़वाली बोली नहीं जानतीं, लेकिन गढ़वाली गाने वह बेहद सुरीले गाती हैं। यही वजह है कि मूल रूप से मुजफ्फरनगर की रहने वाली अस्मिता ने गढ़वाली गाने गाकर लोगों के दिलों को छुआ और खूब प्यार बटोरा। वह जिस तरह बड़ी आसानी से गढ़वाली गीत गाती हैं, इससे श्रोताओं को अहसास भी नहीं होता कि वह गढ़वाली बोली नहीं बोलतीं।
अस्मिता मंगवानिया संगीत के क्षेत्र में नाम कमाने का सपना देखती हैं। हिंदी गानों पर अच्छी पकड़ रखती हैं, लेकिन अस्मिता को इस बात का अंदाजा नहीं था कि उन्हें गढ़वाली गाने से पॉपुलैरिटी मिलेगी। उन्होंने एक गढ़वाली गाने का कवर किया, जिसे खूब पसंद किया गया। सोशल मीडिया पर उन्हें गढ़वाली गाना ही गाने के लिए फरमाइश की जाने लगीं।
संगीत के क्षेत्र में उभरती इस गायिका का कहना है कि वह भले ही मुजफ्फरनगर की निवासी हैं, लेकिन उनकी जड़ें उत्तराखंड से जुड़ी हैं। संगीत उन्होंने अपने माता पिता से ही सीखा है। अस्मिता ने बताया कि उनका बचपन उत्तराखंड में ही बीता है। और वह यहां के संगीत से जुड़ी हैं। आगे भी वह उत्तराखंड की संस्कृति के लिए काम करेंगी।