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निजीकरण के विरोध में उतरी ट्रेड यूनियन

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माई सिटी रिपोर्टर देहरादून। सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियंस और अखिल भारतीय किसान सभा ने मजदूर किसानों की विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है। उन्होंने आशा, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को बढ़ा हुआ वेतन देने और विभिन्न स्तरों पर हो रहे निजीकरण पर तुरंत रोक लगाने की मांग की। किसान सभा के प्रांतीय अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह सजवान और सीटू के प्रांतीय अध्यक्ष प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष राजेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि सार्वजनिक संस्थानों, रेल, आयुध निर्माणियों, कोल इंडिया, हवाई अड्डों के निजीकरण पर रोक लगाई जानी चाहिए। इसके अलावा उत्तराखंड में श्रम कानूनों को समाप्त करने का निर्णय भी वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि आठ के बजाय काम के घंटे 12 करने का आदेश भी वापस होना चाहिए। लॉकडाउन में बेरोजगार हुए मजदूरों को काम देने की मांग भी की। उन्होंने आशा व आंगनवाडी कार्यकत्रियों को कोविड-19 का काम करने पर अलग से 10 हजार देने और 50 लाख रुपये का बीमा करने की मांग की। उन्होंने कम से कम छह माह तक इन कर्मचारियों को 15 हजार रुपये महीना देने की भी मांग की। श्रम एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार बोर्ड में ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों को रखने, किसानों के विषय में जारी केंद्र के तीन अध्यादेश को वापस लेने, आवश्यक वस्तु अधिनियम में बदलाव को वापस लेने, किसानों की फसल की लागत देने का कानून बनाने की मांग की। साथ ही किसानों का बकाया भुगतान जल्द निपटाने, किसानों के कर्ज माफ करने और मजदूरों को लॉकड़ाऊन अवधि का पूरा वेतन भुगतान करने की मांग की। उन्होंने कहा कि वेतन कटौती होने पर सरकार वेतन का भुगतान करे।
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