दून की गाड़ियों को भारत सीरीज का नंबर काफी पसंद आ रहा है। यहां अब तक कुल 542 गाड़ियों में भारत सीरीज की नंबर प्लेट लग चुकी है। इस साल अब तक देहरादून में 300 से अधिक गाड़ियों में बीएच सीरीज की नंबर प्लेट लगाई जा चुकी हैं। नई गाड़ियों के साथ ही पुरानी गाड़ियों में भी यह नंबर लगवाए जा रहे हैं।
गौरतलब हो कि एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने और ट्रांसफर के बाद पुन: पंजीकरण की समस्या से बचने के लिए भारत यानी बीएच सीरीज की नंबर प्लेट लगवाई जा सकती हैं। इस सीरीज की नंबर प्लेट दून के लोगों को खूब रास आ रही है। अपनी पुरानी कार में भी वाहन स्वामी बीएच सीरीज की नंबर प्लेट लगवा रहे हैं। पहले सिर्फ नए वाहनों के स्वामी ही इस नंबर को ले सकते थे, लेकिन जब बीएच सीरीज के प्रयोग को व्यापक बनाने के तहत पुराने वाहनों के लिए यह सुविधा शुरू की गई तो दून के वाहन स्वामी भी इसका लाभ लेने में पीछे नहीं रहे।
Uttarakhand: मंडुवा, झंगोरा, लाल चावल समेत उत्तराखंड के 18 उत्पादों को मिला जीआई टैग, नकल करने पर लगेगी रोक
परिवहन विभाग के लिए घाटे का सौदा
बीएच सीरीज के नंबर के लिए बेशक परिवहन विभाग प्रोत्साहित कर रहा हो, लेकिन इस नंबर प्लेट से परिवहन विभाग को घाटा ही होता है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी गाड़ी की वैल्यू 15 लाख रुपये है, तो सामान्य पंजीकरण में न्यूनतम 1.5 लाख रुपये का टैक्स परिवहन विभाग को प्राप्त होता है। वहीं, बीएच सीरीज के लिए 22 हजार रुपये प्रतिवर्ष के हिसाब से दो साल का टैक्स महज 44,000 रुपये प्राप्त होता है इसलिए परिवहन विभाग को इस सीरीज में नुकसान हो रहा है।
पुराना कर हो जाता रिफंड
आरटीओ सुनील शर्मा ने बताया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से शुरू की गई सुविधा के तहत अभी जिन वाहनों पर अभी सामान्य रजिस्ट्रेशन नंबर मौजूद है, वह भी बीएच सीरीज के रजिस्ट्रेशन नंबर ले रहे हैं। इसके लिए दो साल का कर भुगतान कर नंबर प्लेट जारी कराई जा सकती है। पुराने जमा किए गए कर को रिफंड कर दिया जाता है।
ये कर रहे आवेदन
बीएच सीरीज के नंबर को राज्य व केंद्र सरकार के कर्मचारियों के अलावा ऐसी सभी कंपनियों कर्मचारी ले रहे हैं, जिनके देश में चार या इससे अधिक कार्यालय हैं। किसी कंपनी के चार कार्यालय से कम होने पर यह नंबर प्लेट नहीं ली सकती है।