कालसी ब्लॉक के चापनु और सेंज गाड में बीते 10 साल से तीन हाईड्रम सिंचाई योजना ठप पड़ी है। सिंचाई गूलें और मशीन क्षतिग्रस्त होने से किसानों के खेत तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। वहीं, जडवाला खेड़े में भी पिछले साल से हाईड्रम सिंचाई योजना बंद है। यहां करीब 50 बीघा में मुख्य तौर पर नकदी फसलों की खेती होती है। बारिश न होने और सिंचाई के लिए पानी न मिलने से फसल सूख रही है। किसान लगातार सिंचाई गूलों की मरम्मत की मांग कर रहे हैं, लेकिन विभाग गहरी नींद में सोया है।
जड़वाला खेड़े में पानुवा, मलेथा, अलसी और चामडी आदि गांवों के लिए 30 से अधिक किसान 50 बीघा भूमि पर खेती करते हैं। यहां नकदी फसल जैसे आलू, प्याज, टमाटर, मूली, मटर, गोभी, हरा धनिया, धान, अदरक के साथ गेहूं और मोटा अनाज उगाया जाता है। वर्ष 1980 में सिंचाई के लिए एक हाईड्रम योजना तैयार की गई थी। इसके बाद फसलों को समय से पानी मिलने लगा। पैदावार बढ़ी और किसान समृद्ध होने लगे। बीते साल अमलावा नदी में आई बाढ़ के चलते सिंचाई गूल और मशीन क्षतिग्रस्त हो गई। तभी से खेतों में सिंचाई का संकट बना हुआ है।
ग्राम प्रधान राजेश राठौर, पूर्व प्रधान अर्जुन सिंह, प्रेम सिंह, भोपाल सिंह, गोपाल सिंह, मुन्ना सिंह ने बताया कि जब से हाईड्रम योजना क्षतिग्रस्त हुई है, लघु सिंचाई विभाग का कोई भी अधिकारी मुआयने के लिए नहीं आया। बताया कि अब फिर से सिंचाई गूल की मरम्मत का प्रयास किया जा रहा है। सिंचाई के लिए पानी न मिलने से मटर, प्याज, लहसुन और गेहूं आदि फसलों की बुआई नहीं हो पाई है। वहीं, चापनू गाड में 20 और सेंज गाड में 30 किसानों की भूमि सिंचाई नहीं होने से बंजर हो रही है। यहां वर्ष 2013-14 में हाईड्रम सिंचाई योजना क्षतिग्रस्त हुई थी। तब से सिंचाई गूल और मशीन की मरम्मत नहीं हुई।
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Iसंबंधित जेई ने सिंचाई योजनाओं की मरम्मत कार्य का एस्टीमेट तैयार किया था। जड़वाला में क्षतिग्रस्त हाईड्रम योजना को दोबारा चालू करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। अन्य योजनाओं की मरम्मत के लिए भी शासन से बजट की डिमांड की गई है।
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Iविनय कुमार, अधिशासी अभियंता, लघु सिंचाई विभागI