चकराता के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बुधवार को सीजन का तीसरा हिमपात हुआ। करीब आधे घंटे तक बर्फबारी हुई। मौसम पूरी तरह बदल गया। पहाड़ एक बार फिर बर्फ से लकदक हो गए। सतह पर करीब तीन इंच बर्फ जमा हो गई। स्थानीय लोगों ने बर्फबारी का जमकर लुत्फ उठाया। चकराता का न्यूनतम तापमान माइनस एक डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। बर्फबारी से स्थानीय बागवानों और किसानों को बड़ी राहत मिली है। फलदार पेड़ों का चिलिंग पूरा होने से पैदावार बढ़ने की उम्मीद है।
चकराता में बीते दो दिनों से आसमान में बादल छाए हुए थे। सोमवार की रात को तेज बारिश हुई थी। मंगलवार को भी दिनभर हल्की बूंदाबांदी होती रही। बुधवार को सुबह आसमान में बादल छाए हुए थे। दोपहर करीब 2.30 बजे ठिठुरन बढ़ने लगी। न्यूनतम तापमान शून्य से नीचे चला गया। दोपहर करीब 3.30 बजे अचानक से बर्फबारी शुरू हो गई। लोखंडी, जाड़ी, कुनैन, अमराड़, झबराड़, मुंडोई, कचाणू, खड़बा, देवबन, मोईला, कनासर आदि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में करीब आधे घंटे तक बर्फबारी होती रही।
घर की छतों, देवदार, बांज, बुरांश के पेड़ों पर बर्फ की सफेद चादर बिछ गई। बर्फबारी की उम्मीद लगाए स्थानीय बागवानों, किसानों, पर्यटन व्यावसायियों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई। चकराता में अधिकतम तापमान आठ डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है।
सेब की पौधे लगाने का सही समय
- बर्फबारी चकराता के सेब बागवानों के लिए वरदान साबित होगी। कोटि निवासी सेब बागवान जगतराम नौटियाल, बुल्हाड़ निवासी विजयपाल सिंह रावत, मुंडोई निवासी कलम सिंह चौहान, खजान सिंह, मेहर सिंह, अतर सिंह आदि ने बताया कि बर्फबारी से सेब के पेड़ों के चिलिंग आवर्स पूरे हो जाएंगे। इससे पड़ों पर अच्छा पुष्पण होगा। मार्च में अच्छे पुष्पण से फलों की पैदावार भी बढ़ेगी। कृषि विज्ञान केंद्र ढकरानी के प्रमुख डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि यह समय सेब की पौधे लगाने के लिए सही है। बगीचों की भूमि में पर्याप्त नमी होने से पौधे का विकास अच्छा होगा।
कब-कब हुई बर्फबारी
सीजन की पहली बर्फबारी 31 जनवरी, दूसरी चार फरवरी, तीसरी 21 फरवरी को हुई।