अपने जीवन काल में अयोध्या में रामलला का भव्य मंदिर बनना और उसमें रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने की उम्मीद नहीं थी। आज जब यह सपना सच हुआ तो ऐसा लग रहा है मानो जीवन सफल हो गया। यह कहना है कार सेवक रहे मंडी समिति साहिया के पूर्व चेयरमैन और वरिष्ठ भाजपा नेता नैन सिंह राणा का।
हरिपुर कालसी निवासी नैन सिंह राणा ने बताया कि आंदोलन के दौरान वे और कालसी गेट निवासी वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर कृष्ण अवतार वाजपेयी अयोध्या जाने के लिए निकले, लेकिन रास्ते में ही पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। अगले दिन वे रिहा हो गए। 28 नवंबर 1992 में वह फिर से अयोध्या कार सेवा करने के लिए निकल पड़े।
छह दिसंबर 1992 को ढांचा ढहाए जाने वाले दिन वह अयोध्या में थे। ढांचा ढहने के पश्चात उनकी ड्यूटी भोजन वितरण में लगी हुई थी। देर रात पुलिस और प्रशासन ने अनाउंसमेंट किया कि सभी कार सेवक तत्काल अपने-अपने घर चले जाएं। यहां पर सैन्य बल आने वाले हैं। वह रेल से अगले दिन देहरादून पहुंचे। जहां रेलवे स्टेशन पर पहले से ही मौजूद पुलिस के ट्रक में बैठाकर उन्हें विकासनगर पुलिस चौकी छोड़ा गया।
तत्कालीन पुलिस क्षेत्राधिकारी ने बताया अयोध्या में ढांचा ढहाए के आरोप में उन पर मुकदमा दर्ज हुआ है। उन्हें जमानत करानी होगी। नैन सिंह राणा ने कहा कि 22 जनवरी का दिन उन्हें जीवन में हमेशा याद रहेगा।