स्थानांतरण के लिए नहीं किया आवेदन
आज के दौर में हर कोई सुविधाजनक जीवन जीना जाता है। यही कारण है कि सरकारी शिक्षक भी सुगम क्षेत्रों के विद्यालयों में तैनाती चाहते हैं। अगर किसी कि दुर्गम या अतिदुर्गम क्षेत्र में तैनाती हो जाए तो वह स्थानांतरण के लिए पूरा प्रयास करते हैं। लेकिन, कालसी ब्लॉक की तीन शिक्षकाओं का मन दुर्गम क्षेत्र में रम गया है। इन शिक्षिकाओं को सुगम क्षेत्र का अब कोई मोह नहीं है। तीनों शिक्षिकाओं ने कभी स्थानांतरण के लिए आवेदन नहीं किया। न भविष्य में स्थानांतरण के इच्छुक हैं।
राजकीय प्राथमिक विद्यालय नागथात में तैनात शिक्षिका पूनम घिल्डियाल बीते आठ वर्षों से सेवा दे रही हैं। उनका कहना है कि पर्वतीय क्षेत्र के निवासी और बच्चे अधिक विनम्र और अनुशासित होते हैं। इसलिए वह यहां के बच्चों को सेवा भाव से पढ़ाना चाहती हैं। राजकीय प्राथमिक विद्यालय जामुवा में बीते 11 वर्षों से तैनात शिक्षिका गुरमीत कौर ने भी कभी स्थानांतरण के लिए आवेदन नहीं किया। वह बताती हैं कि पर्वतीय क्षेत्रों के बच्चों को अच्छी शिक्षा के कम मौके मिलते हैं। वह अच्छी शिक्षा देकर उन्हें आगे बढ़ाना चाहती हैं। उनका कहना है कि इसमें अभिभावकों की ओर से भी प्रयास की जरूरत है।
राजकीय प्राथमिक विद्यालय नराया में बीते 11 वर्षों से तैनात शिक्षिका रीता यादव भी पर्वतीय क्षेत्र में ही रहकर छात्रों को पढ़ना चाहती हैं। उनका कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों के छात्र शिक्षकों का बहुत सम्मान करते हैं। विशेष बात इन सभी शिक्षिकाओं के परिवार देहरादून रहते हैं। जबकि तीनों शिक्षिकाएं दूरस्थ क्षेत्रों में रहकर समर्पित भाव से सेवाएं देकर समाज में मिसाल कायम कर रही हैं।