यूपी के जमाने में वर्ष 1975 में हुई थी स्थापना
अभिभावकों ने की छह से 10वीं तक की कक्षाएं शुरु करने की मांग
जिले में एक ऐसा अनोखा इंटर कॉलेज भी है, जहां सिर्फ 11वीं और 12वीं की ही कक्षाएं संचालित होती हैं। यहां 11वीं में दाखिले के लिए पहले किसी अन्य स्कूल से हाईस्कूल पास करनी पड़ती है। अभिभावकों ने विद्यालय में कक्षा छह से 10 तक की कक्षाएं भी शुरु करने की मांग की है।
जीआईसी पुरोड़ी में वर्तमान सत्र में महज 40 छात्र पंजीकृत हैं। चकराता विकासखंड मुख्यालय के निकट पुरोड़ी नामक कस्बे में 1975 में राजकीय इंटर कॉलेज की स्थापना हुई थी, लेकिन बीते 47 वर्षों से यहां महज 11वीं और 12वीं की कक्षाएं की संचालित हो रही हैं।
पीटीए (अभिभावक शिक्षक संघ) अध्यक्ष शूरवीर चौहान का कहना है कि कक्षा छह से 10वीं तक कक्षाएं संचालित किए जाने को लेकर विभाग से कई बार पत्राचार किया जा चुका है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। यूपी के जमाने से जारी व्यवस्था आज भी चल रही है। मजबूरी में आसपास के गांव के छात्रों को 10वीं तक की पढ़ाई के लिए पहले दूसरे स्कूलों में प्रवेश लेना पड़ता है। हाईस्कूल उत्तीर्ण होने पर वे इंटर कॉलेज में प्रवेश ले पाते हैं।
10वीं तक की पढ़ाई के लिए नापनी पड़ती है पैदल दूरी
खत उपलगांव और सैली खत के अंतर्गत आने वाले बिरमोऊ, ठाणा, टुंगरा, छटोऊ, कुनावा, लांघा पोखरी, नवीन चकराता सहित एक दर्जन से अधिक गांवों के छात्रों को पढ़ाई के लिए कैंट इंटर कॉलेज चकराता या फिर राजकीय इंटर कॉलेज नगऊ जाना पड़ता है। स्कूल पहुंचने के लिए छात्रों को 7-10 किमी की दूरी नापनी पड़ती है। अक्सर वाहन न मिलने पर यह छात्र पैदल ही स्कूल पहुंचते हैं।
छात्र संख्या 40, शिक्षक 9
वर्तमान में कला वर्ग के हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत अर्थशास्त्र, नागरिक शास्त्र, तथा विज्ञान वर्ग के गणित, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान विषयों के कुल नौ प्रवक्ता हैं। कक्षा 11वीं में 16 तथा कक्षा 12वीं में 32 छात्र -छात्राएं अध्ययनरत हैं।
वर्षवार छात्र संख्या
स्कूल में वर्ष 2018-19 में 52, वर्ष 2019-20 में 56, वर्ष 2020-21 में 49, वर्ष 2021-22 में 50, 2022-23 में छात्र संख्या 48 है।
वर्जन
उत्तर प्रदेश के समय से ही यह व्यवस्था चली आ रही है। जिले में ऐसा कोई दूसरा इंटर कॉलेज नहीं है। कक्षा छह से 10वीं तक की कक्षाएं संचालित होने पर आसपास के गांवों के छात्रों को सुविधा होगी। - जीपी थपलियाल, प्रधानाचार्य
वर्जन
यदि अभिभावक शिक्षक संघ की ओर से कोई ठोस सुझाव आता है, तो प्रस्ताव को स्वीकृति के लिए शासन को भेजा जाएगा। यह शासन स्तर का मामला है। - प्रदीप कुमार, मुख्य जिला शिक्षाधिकारी