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Dehradun News: राज्य निर्माण से जगी थी सड़क की आस, इंतजार में आबादी हो गई हाफ

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Iपहले 400 थी आबादी अब गांव में केवल 200 ग्रामीणI
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I रोज चढ़नी पड़ती है चार किलोमीटर की चढ़ाईI
कालसी तहसील क्षेत्र के किमोठा गांव में करीब 400 की आबादी रहती है। यहां ग्रामीणों को सड़क तक पहुंचने के लिए चार किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। गांव से सड़क तक तो ढलान होने के चलते रास्ता आसान है। लेकिन वापसी में सामान के साथ इतनी ही दूरी की खड़ी चढ़ाई ग्रामीणों की कमर तोड़ देती है। गांव में राज्य निर्माण के बाद से ही सड़क निर्माण की मांग उठ रही है। करीब 21 वर्ष के इंतजार के बाद भी गांव तक सड़क नहीं पहुंची। वहीं दो दशक के दौरान पलायन के चलते गांव की आबादी आधी रह गई है।
ग्राम पंचायत कनबुआ के किमोठा गांव में 16 परिवार रहते हैं। गांव की मौजूदा आबादी 200 के करीब है। लेकिन आज भी गांव में सड़क जैसी मूलभूत सुविधा नहीं है। गांव तक की चार किलोमीटर के खड़ी चढ़ाई ग्रामीणों के लिए लगातार चुनौती बनी हुई है। सबसे अधिक परेशानी बीमार लोगों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने में होती है। बीमारों और गर्भवतियों को डंडे के सहारे लाना पड़ता है। ग्रामीण राशन और अन्य जरूरी सामान भी पीठ पर लादकर गांव तक लाते हैं। ग्रामीण लगातार गांव तक सड़क के निर्माण की मांग कर रहे हैं। राज्य निर्माण के बाद दो बार सड़क के लिए सर्वे भी हुआ, स्वीकृति भी मिल गई। लेकिन अब तक सड़क नहीं बनी है।
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Iअब साहिया में रहता हूं। गांव तक की चढ़ाई चढ़ने में दिक्कत आती है। पिछले पांच छह साल से गांव नहीं जा पाया। सर्वे की बात सुनकर गांव तक सड़क पहुंचने की उम्मीद जगी थी। लेकिन सड़क का काम आज तक शुरू नहीं हुआ। शायद सड़क निर्माण सपना ही बनकर रह जाएगी। - गुलाब दास, स्थानीय ग्रामीण
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Iगांव के लिए दो बार सड़क बनाने के लिए सर्वे किया जा चुका है। लेकिन सड़क का काम शुरू नहीं हुआ। किसी भी काम से बाजार जाना हो तो सड़क मार्ग तक जाने के लिए चार किलोमीटर चलना पड़ता है। गांव वापसी के दौरान खड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। कई ग्रामीण इसी कारण पलायन भी कर गए। - दिनेश, स्थानीय ग्रामीण
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Iमेरा गांव मेरी सड़क के तहत गांवों में सड़क बन रही है। केवल किमोठा में ही सड़क निर्माण नहीं हो रहा है। बीमारों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने में परेशानी होती है। अगर यही हाल रहा तो लोग गांव में कैसे रहेंगे। - खिम्मा दास, स्थानीय ग्रामीणI


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