क्षेत्र में खिलाड़ियों के अभ्यास के लिए कोई स्टेडियम नहीं हैं। खिलाड़ी खुले में डाकपत्थर बैराज ग्राउंड में अभ्यास करते हैं। यहां समुचित व्यवस्थाएं नहीं हैं। वर्तमान में मैदान सिंचाई विभाग के नियंत्रण में है। खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों ने निजी संसाधनों से ही रनिंग ट्रैक और क्रिकेट पिच तैयार की है। क्षेत्रीय विधायक मुन्ना चौहान ने इस मैदान को स्टेडियम के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की है। खेल विभाग के अधिकारी भी मैदान का निरीक्षण कर चुके हैं। यदि योजना परवान चढ़ी तो भविष्य में खिलाड़ियों को स्टेडियम नसीब हो जाएगा। उन्हें अपनी निखारने का एक मंच मिल जाएगा।
वर्ष 1970 में डाकपत्थर में जल विद्युत परियोजना निर्माण के दौरान मैदान भी बनाया गया। मैदान करीब 50 बीघा में फैला है। यहां क्रिकेट, फुटबाल टूर्नामेंट के साथ ही एथलेटिक्स प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। खिलाड़ी लंबे समय से इसे स्टेडियम के रूप में विकसित करने की मांग कर रहे हैं। मैदान के चारों ओर चहारदीवारी नहीं हैं। यहां निराश्रित गोवंश घुसकर मैदान को नुकसान पहुंचाते हैं। रात के समय ग्राउंड असामाजिक तत्वों का अड्डा बन जाता है। घेराबंदी न होने से लोग रनिंग ट्रैक पर वाहन भी दौड़ा देते हैं।
Iमैदान में खिलाड़ियों के साथ ही सेना और अर्द्ध सैनिक बल में भर्ती होने के लिए युवा अभ्यास करते हैं। वर्तमान में मैदान की घेराबंदी जरूरी है। इससे मैदान को नुकसान नहीं पहुंचेगा।
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Iमृदुल रावत, एथलीट
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Iक्षेत्र में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। यहां कोई खेल स्टेडियम नहीं है। यदि स्टेडियम बनता है तो खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने का एक मंच मिल जाएगा।
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Iपंकज नैथानी, पूर्व खिलाड़ी
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Iमैं फुटबाल खेलता हूं। खिलाड़ियों के लिए कोई सुविधा नहीं है। खेल प्रेमियों और खिलाड़ी अपने स्तर से मैदान की देखरेख करते हैं। स्टेडियम का निर्माण होना चाहिए।
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Iअमन डबराल, खिलाड़ीI