क्षेत्र के पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। गर्मियों की दस्तक के साथ ही पछवादून और जौनसार बावर क्षेत्र में बड़ी संख्या में सैलानी घूमने के लिए आते हैं। वे चिलचिलाती धूप से राहत पाने के लिए नदी, नहरों और गदेरों में उतरते हैं। अक्सर पानी की गहराई न भांप पाने के कारण वे डूब जाते हैं। बीते बृहस्पतिवार को भी कटापत्थर स्थित पर्यटक स्थल पर यमुना में नहाने के दौरान बाबूगढ़ विकासनगर निवासी छात्रनेता शिवम भटनागर की मौत हो गई थी।
यदि सिर्फ कटापत्थर की बात करें तो यहां प्रतिवर्ष औसतन तीन से चार लोगों की डूबने से मौत हो जाती है। बीते एक माह में दो युवक डूब चुके हैं। हालांकि, डाकपत्थर और चकराता में एसडीआरएफ की टुकड़ी तैनात हैं, लेकिन घटनास्थल तक पहुंचने में देरी की चलते समय पर राहत और बचाव कार्य शुरू नहीं हो पाते हैं। पुलिस क्षेत्राधिकारी भाष्कर शाह ने कहा कि सभी पर्यटक स्थलों पर जल पुलिस और एसडीआरएफ की तैनाती कर पाना संभव नहीं है। संबंधित विभागों ने जगह-जगह लोगों को आगाह करने के लिए चेतावनी बोर्ड लगाए हैं। पर्यटक नहाने के लिए नदी-नालों में न उतरें, इसके लिए संबंधित थाना और चौकी प्रभारियों को पहले ही निर्देशित किया जा चुका है।
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यहां नहीं हैं सुरक्षा के इंतजाम
यमुना किनारे कटापत्थर, नौरोपुल, भीमावाला, जुड्डो, यमुना पुल, आसन नदी, टौंस नदी किनारे स्थित किल्लौड़, गुप्त सहस्रधारा, खादर, तुनिया, खेरुवा, चकराता स्थित टाइगर फॉल, त्यूणी स्थित टौंस नदी के किनारे बड़ी संख्या में सैलानी पहुंचते हैं, लेकिन यहां पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं।
हमेशा बनी रहती है हादसे की आशंका
कटापत्थर से आगे जुड्डो बांध हैं। यहां से यमुना में पानी छोड़ा जाता है, हालांकि पानी छोड़ने से पहले साइरन बजता है, बावजूद लोग नदी में ही मस्त रहते हैं। जलस्तर बढ़ने पर कई बार लोगों के सामान बह जाते है। लोगों को भागकर जान बचानी पड़ती है।
जल पुलिस में तैनात हैं मात्र पांच सिपाही
डाकपत्थर में जल पुलिस की यूनिट तैनात है। इसमें पांच सिपाही हैं। इनमें से एक गोताखोर है। जिन पर पूरे पछवादून और जौनसार बावर की जिम्मेदारी है।