ग्रामीणों ने गांव के पास ही पशुओं के लिए अस्थायी व्यवस्था करने की उठाई मांग
आपदा प्रभावित गांव जाखन के ग्रामीण अपने पशुओं और फसलों की देखभाल के लिए चार किमी की दूरी नाप रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से गांव के पास ही सुरक्षित स्थान पर पशुओं के लिए अस्थायी व्यवस्था करने की मांग की है। साथ ही पुनर्वास की मांग भी दोहराई है।
आपदा प्रभावितों ने गांव से करीब चार किमी दूर स्थित जूनियर हाईस्कूल पष्टा के भवन में शरण ली हुई है। यहां प्रशासन की ओर से राहत कैंप बनाया गया है। फिलहाल, उनके पशु गांव में ही हैं। आपदा प्रभावित प्रधान प्रतिनिधि अंकित तोमर, मंजीत, बाबू सिंह, रामानंद आदि का कहना है कि अधिकांश लोगों का मुख्य व्यवसाय खेती और पशुपालन है। वे अपने पशुओं और फसलों को लेकर चिंतित हैं। खेतों में मक्का, अरदक, हल्दी, राजमा की फसल खड़ी है।
पूरे गांव के आपदा प्रभावित होने के चलते वे गांव नहीं जा पा रहे हैं। इस कारण वह फसलों की देखभाल नहीं कर पा रह हैं। उन्होंने सारे गांव को विस्थापित करने के साथ ही वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर गांव के समीप ही उन्हें स्थान उपलब्ध कराने की मांग की है।
नहीं बढ़ीं दरारें, 24 घंटे की जा रही निगरानी
एसडीएम विनोद कुमार ने बताया कि फिलहाल दरारें नहीं बढ़ी हैं। कोई भूस्खलन भी नहीं हुआ है। स्थिति पर 24 घंटे नजर रखने के लिए दो लेखपाल गांव में ही मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामीण विस्थापन की मांग कर रहे हैं। इसे देखते हुए गांव के आसपास पुनर्वास को लेकर भूमि को चिह्नित किए जाने का काम शुरू कर दिया गया है। बता दें कि बीते बुधवार को जाखन गांव भूस्खलन की जद में आया गया था। इससे 10 मकान जमींदोज हो गए थे। दो को आंशिक क्षति पहुंची थी। एहतियात के तौर पर पूरे गांव को खाली करा दिया गया था। गांव में 28 परिवार निवास करते हैं। आपदा प्रभावितों ने हाईस्कूल के साथ ही अपने रिश्तेदारों के यहां शरण ली हुई है।