भोगपुर में खादी ग्रामोद्योग केंद्र का उत्पादन केंद्र हथकरघा उद्योग को नई दिशा दे रहा है। खासकर महिलाओं को हथकरघा उद्योग से जोड़ने में यह केंद्र अहम भूमिका निभा रहा है। यहां से मिले कताई के हुनर से महिलाएं अपनी तकदीर बदल रही हैं। महिलाओं को हुनरमंद बनाकर यह केंद्र उनके जीवन स्तर को सुधारने और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में कारगर सिद्ध हो रहा है।
देहरादून में महिलाओं को उनके पैरों पर खड़ा करने में हथकरघा बड़ी भूमिका निभा रहा है। दून के भोगपुर में स्थित हथकरघा उत्पादन केंद्र हाथ से बुनाई की परंपरा को जीवित रखे है। पिछले कुछ वर्षों में युवा पीढ़ी का हथकरघा से मोह भंग हुआ, लेकिन यह केंद्र फिर से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को हथकरघा से जोड़ रहा है। यहां से प्रशिक्षण पाकर महिलाएं सूत कातने का काम कर रही हैं। इसके अलावा प्रशिक्षण पाकर महिलाएं रिंगाल की टोकरी, कंडी, भेड़ की ऊन से बनी शॉल, हाथ वाला पंखा, दुपट्टा, जूट से बने कारपेट, भीमल के नेचुरल फाइबर से बने विभिन्न प्रकार के उत्पाद बना रही हैं।
जिला खादी ग्रामोद्योग अधिकारी अलका पांडेय ने बताया कि दून में यह केंद्र महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़़ रहा है। महिलाओं को 169 से 230 रुपये प्रति पीस के हिसाब से मानदेय भी दिया जा रहा है।