तहसील क्षेत्र कालसी अंतर्गत खमरोली गांव के 10 लोगों के मकान आपदा की जद में आ गए हैं। जिसमें से चार घरों के नीचे बनी सुरक्षा दीवारों पर गहरी दरारें आ गई हैं। मौसम खराब होते ही लोगों की दिन का चैन व रात की नींद भी उड़ जाती है। डर के कारण लोग जागकर रात काट रहे हैं। कई परिवार अपनी पुश्तैनी मकान छोड़ अन्य जगहों पर मकान बनाने के लिए भूमि तलाश कर रहे हैं।
जिला देहरादून के कालसी ब्लॉक अंतर्गत खमरोली गांव में करीब 50 परिवार निवास कर रहे हैं। वर्ष 2010 में आई भीषण आपदा से गांव के नीचे जमीन खिसकने से गांव के करीब 35 परिवारों के मकानों को खतरा पैदा हो गया था। दरारों के साथ ही मकानों के आगे बने आंगन भी धंस गए थे। तब जैसे तैसे आपदा प्रभावितों ने निजी संसाधनों से सुरक्षात्मक कार्य कराए थे। बीती 25 सितंबर को एक बार फिर हुई अतिवृष्टि ने ग्रामीणों को हिलाकर रख दिया। इस बार फिर से 10 परिवारों के मकानों के नीचे धंसने का खतरा उत्पन्न हो गया है। चार मकानों के नीचे गहरी दरारें आई है। दरारें पड़ने के कारण प्राथमिक विद्यालय व पंचायत घर पर भी खतरा बना हुआ है। प्रभावित ग्रामीण ज्ञान सिंह तोमर, सुंदर दास, चेतु दास, कुंदन दास आदि लोगों के मकान गिरने की कगार पर पहुंच गए हैं। कई दूसरे परिवारों को भी खतरा बना हुआ है। स्थानीय निवासी अमर सिंह तोमर, रणवीर सिंह तोमर, भगत सिंह तोमर का कहना है कि सुरक्षा कार्य कराए जाने को लेकर कई बार संबंधित विभागों को लिखा जा चुका है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने बताया कि अब उन्होंने अपने पुस्तैनी मकान छोड़ कर दूसरे स्थान पर मकान बनाने का मन बना लिया है, जिसके लिए जगह की तलाश की जा रही है। उपजिलाधिकारी कालसी सौरभ असवाल ने बताया कि खमरोली गांव के लोगों ने समस्या से उन्हें अवगत कराया है। क्षेत्रीय पटवारी को मौके पर जाकर स्थिति का आकलन कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट के आधार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।