सिंगल लेन हाईवे पर सफर कर रही 150 गांवों की आबादी
आठ साल बाद भी डबल लेन नहीं हो सका राष्ट्रीय राजमार्ग
राष्ट्रीय राजमार्ग त्यूणी-चकराता-मसूरी-मलेथा अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। यह नाम मात्र का राजमार्ग बनकर रह गया है। करीब 25 किमी हिस्सा जर्जर हाल है। राजमार्ग पर वाहन चलाना तो दूर पैदल चलना भी मुश्किल है।
31 मार्च 2015 को कुल 300 किमी लंबे त्यूणी-चकराता-मसूरी-मलेथा मोटर मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग का दर्जा दिया गया। त्यूणी से लेकर लखवाड़ बैंड तक 127 किमी हिस्सा जौनसार बावर से होकर गुजरता है। वर्तमान में सिंगल लेन राष्ट्रीय राजमार्ग की चौड़ाई 5.93 मीटर है।
राज्य मार्ग घोषित होने पर सड़क की दशा सुधरने की उम्मीद थी, लेकिन अब भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। माख्टी पोखरी से चकराता के समीप स्थित आलू मंडी तक का करीब 25 किमी स्थित बदहाल पड़ा है। पेंटिंग उखड़ चुकी है। सड़क पर गहरे गड्ढे बने हैं। कई जगहों पर सुरक्षा दीवारें टूटी हुई हैं। कई जगहों पर हाईवे संकरा और अंधे मोड हैं। जिससे हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। नालियां और स्क्रबर चोक होने से बरसात में पानी सड़क पर जमा हो जाता है। संवाद
हाईवे से जुड़े हैं 150 से अधिक गांव
राष्ट्रीय राजमार्ग हिमाचल प्रदेश के साथ ही टिहरी और उत्तरकाशी जिले को जोड़ता है। लखवाड़, बहलाड़, कोरू, सैली, उपलगांव, धुनौ, मशक, भरम, बावर समेत डेढ़ दर्जन से अधिक खतों के 150 से अधिक गांव हाईवे से जुड़े हैं।
जुड़े हैं पर्यटक स्थल
राष्ट्रीय राजमार्ग से पर्यटक स्थल नागथात, बैराठखाई, चुरानी, सवाई डांडा, माख्टी पोखरी, रामताल गार्डन, बिरमोऊ डांडा, नवीन चकराता पुरोड़ी, ठाणा डांडा, चिरमिरी टॉप, चकराता, जाड़ी, लोखंडी, बुधेर गुफा, मोईला टॉप, कोटी कनासर बुग्याल आदि पर्यटक स्थल जुड़े हैं।