जौनसार बाबर के सबसे पुराने अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज का छात्रावास पिछले डेढ़ दशक से जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है। दुर्गम क्षेत्र के अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के छात्रों के लिए यह छात्रावास बनाया गया था। मौजूदा हाल यह है कि स्कूल में पढ़ने वाले दुर्गम क्षेत्र के छात्र यहां किराए के कमरे लेकर पढ़ने का मजबूर हैं।
जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर के साहिया में वित्त वर्ष 1974 से 75 के बीच राजकीय इंटर कॉलेज की स्थापना की गई थी। वित्त वर्ष 1976-77 में यहां दुर्गम क्षेत्र के अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के 40 छात्रों के लिए समाज कल्याण विभाग ने आठ कमरों का छात्रावास बनाया गया। लेकिन देखरेख और मरम्मत के अभाव में छात्रावास का भवन जर्जर हो गया। भवन की छत भी गिर चुकी है। छात्रावास के चारों ओर झाड़ियां उग आई हैं। दुर्गम क्षेत्रों के छात्र यहां किराए के कमरों में रह रहे हैं। उनको कमरों के लिए हर माह 1500 और 3000 रुपये शुल्क देना पड़ता है।
पीटीए अध्यक्ष अनिल सिंह तोमर ने बताया कि छात्रावास की कमी से वास्तव में छात्रों को बड़ी परेशानी हो रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1990 से ही छात्रावास की मरम्मत की मांग चलती आ रही है। प्रधानाचार्य सीएस भंगारी ने बताया कि समस्या को लेकर कई बार पत्राचार किया जा चुका है। बताया कि में क्षेत्रीय विधायक और जिला पंचायत अध्यक्ष से भी छात्रावास के जीर्णोद्धार की गुहार लगाई जाएगी।
दुर्गम क्षेत्र के छात्रों के लिए रोज आना-जाना या किराए के कमरे में रहना दो ही विकल्प हैं। रोजाना आने-जाने में सुबह से शाम हो जाती है। ऐसे में होमवर्क और पढ़ाई कैसे करेंगे। छात्रावास की सुविधा होनी चाहिए। - शिवम प्रसाद, छात्र, 11वीं
जिन छात्रों के रिश्तेदार साहिया में रहते हैं उनके लिए सुविधा है। लेकिन दुर्गम क्षेत्रों के अन्य छात्रों को रोज घर से स्कूल और स्कूल से घर जाना पड़ता है। आने-जाने में हालत बुरी हो जाती है। कमरे का किराया भी 1500 से 3000 रुपये के बीच है। ऐसे में पढ़ाई कैसे होगी। - अनुज, छात्र, 12वीं
सरकारी स्कूल का पढ़ाई का खर्च भी प्राइवेट की फीस के बराबर पड़ता है। यहां छात्रों को किराए के कमरे लेकर पढ़ता होता है। दूसरा विकल्प रोजाना आवागमन है। इसमें भी यूटिलिटी का किराया देना पड़ता है। - रोहित, छात्र, 12वीं
छात्रावास न होने से दुर्गम क्षेत्रों के छात्रों को बड़ी परेशानी होती है। किराए के कमरे और रोजाना आना-जाना दोनों ही महंगा पड़ता है। लेकिन क्या करें मजबूरी है। छात्रावास का दोबारा निर्माण होना ही चाहिए। - हर्ष चौहान 12वीं
डेढ़ साल पहले छात्रावास का निरीक्षण किया गया था। छात्रावास की स्थिति बेहद खराब है। विद्यालय की ओर से अगर नए भवन का प्रस्ताव मिलता है तो शासन स्तर पर पत्राचार किया जाएगा। - सुमित नेगी, समाज कल्याण अधिकारी, कालसी