उदियाबाग और गुडिरिच टी स्टेट की मौजूदा वस्तुस्थिति के बारे में उच्च न्यायालय ने तहसील प्रशासन से रिपोर्ट तलब की है। याचिकाकर्ता का आरोप है जिला प्रशासन ने तहसील प्रशासन से दो बार चाय बागान की जांच रिपोर्ट मांगी। सर्वे लेखपाल ने दो बार रिपोर्ट भी तैयार की लेकिन एसडीएम ने दोनों रिपोर्ट पर हस्ताक्षर नहीं किए। आरोप है कि तहसील प्रशासन ने न्यायालय के समक्ष कहा कि चाय बागान में कृषि भूमि नहीं है। जबकि याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि उच्च न्यायालय के आदेश पर हुई जांच की ताजा रिपोर्ट में भी भूमि पर गेहूं, लेमन घास की खेती और पेड़ पाए गए हैं।जानकारी के अनुसार वर्ष अगस्त 2022 में चाय बागान श्रमिक संघ के मंत्री देवानंद पटेल ने न्यायालय अपर कलेक्ट्रेट में प्रार्थना पत्र दिया था। कहा था कि उदियाबाग और गुडिरिच टी स्टेट विकासनगर में ब्रिटिशकाल से 1836 श्रमिक पीढ़ी दर पीढ़ी कार्य कर रहे हैं। श्रमिकोंं को मालिकाना हक मिलने के साथ प्रबंधन की ओर से चाय बागान की भूमि को खुर्द बुर्द करने की साजिश पर तत्काल रोक लगाई जाए। देवानंद पटेल का आरोप है कि अप्रैल 2023 में जिला प्रशासन के आदेश पर सर्वे लेखपाल ने रिपोर्ट तैयार की। जिसमें बताया गया कि 105.859 हेक्टेयर भूमि गद्दी नशीन महंत देवेंद्र दास प्रबंधक श्री गुरु राम राय एजुकेशन मिशन देहरादून चेला महंत चरण दास के नाम वर्ष 1367 से दर्ज है। 7.6400 हेक्टेयर भूमि पर कृषि कार्य किया जा रहा है। कुछ भाग पर लेमन घास लगाई गई है। वहीं, अधिकतर भाग पर चाय बागान का कार्य किया जा रहा है। अन्य भागमें झाड़ियां पाई गईं। आरोप लगाया कि एसडीएम ने रिपोर्ट पर अपने हस्ताक्षर नही किए। उसके बाद उन्होंने फिर से न्यायालय अपर कलेक्ट्रेट प्रार्थना पत्र दिया। जिसपर 29 अप्रैल 2023 अपर कलेक्टर प्रशासनिक ने एसडीएम को भूमि का स्थलीय निरीक्षण कर एक सप्ताह में नक्शे के साथ रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। बताया कि रिपोर्ट में भी पहली रिपोर्ट की ही तस्दीक की गई। उसके साथ फसली वर्ष में भूमि पर चाय की फसल भी अंकित दिखाई गई। 23 जून 2023 को सर्वे लेखपाल ने अपनी रिपोर्ट दी। लेकिन एसडीएम ने रिपोर्ट पर हस्ताक्षर नहीं किए। देवानंद पटेल ने बताया कि 29 अप्रैल 2025 को उन्होंंने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दाखिल की। याचिका में सचिव कृषि एवं किसान कल्याण, उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड, जिलाधिकारी, प्रभागीय प्रधान मुख्य वन संरक्षक, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, श्री गुरु राम राय मिशन, श्रम आयुक्त और प्रबंधन उदियाबाग, गुडिरिच टी स्टेट को पार्टी बनाया गया। आरोप लगाया कि 2 मई को पहली सुनवाई के दौरान एसडीएम ने कहा कि चाय बागान में कृषि भूमि नहीं है। बताया कि उच्च न्यायालय ने एसडीएम को भूमि स्थलीय निरीक्षण के बाद वस्तु स्थिति पर रिपोर्ट प्रस्तुत करनेे के आदेश दिए। दावा किया कि उच्च न्यायालय के आदेश पर हुई जांच की ताजा रिपोर्ट में चाय बागान की भूमि पर उदियाबाग में 21.1490 हेक्टेयर भूमि पर लेमन ग्रास, गेहूं और गुडरिच 6.5680 हेक्टेयर भूमि पर शीशम के पेड़ और झाड़िया उगी मिलींं। उन्होंने रिपोर्ट के साथ छेड़खानी की आशंका जताई है।