12 साल शांटी और 12 साल पांशी में रहते है चालदा महासू
उत्तराखंड और हिमाचल के लोगों के आराध्य चारों महासू देवताओं की महिमा निराली है। चारों महासू में से एक भाई चालदा महाराज अपने नाम के अनुरूप चलायमान रहते हैं। महाराज सदैव जौनसार बावर, उत्तरकाशी और हिमाचल प्रदेश के सीमांत क्षेत्र के गांवों में भ्रमण और अल्प अवधि के लिए प्रवास करते हैं। देवता स्वयं अपने प्रवास के स्थान और प्रवास अवधि का निर्णय करते हैं। देवता पालकी में सवार होकर अपने वजीर के साथ प्रवास स्थल पर पहुंचकर भक्तों को दर्शन देते हैै।
चालदा महाराज चलायमान क्यों है, यह सवाल सभी भक्तों के मन में कौंधता है। इसके पीछे एक पुरानी कथा है। महासू मंदिर समिति हनोल के सचिव मोहन लाल सेमवाल बताते हैं कि चारों महासू भाइयों में बंटवारा हुआ था। बौठा महासू देवता ने बौठाराज यानी जौनसार बावर स्थित हनोल का चयन किया। वहीं बासिक को शांटी (जौनसार और हिमाचल प्रदेश क्षेत्र) और पबासिक को पांशी (उत्तरकाशी और सीमांत हिमाचल क्षेत्र) मिला।
चालदा महासू के हिस्से में 12 -12 वर्ष के लिए शांटी और पांसी दोनों ही क्षेत्र क्रमवार आए, तब से वह चलायमान है। शांटी और पांशी दोनों क्षेत्रों में चालदा महाराज के दो अलग-अलग वजीर है। शांटी के वजीर दीवान सिंह और पांशी के वजीर जयपाल सिंह है।
मोहन लाल सेमवाल ने बताया कि शांटी क्षेत्र में चालदा महाराज के 12 मंदिर है। महाराज के पूजन के लिए बारी-बारी से हनोल स्थित बौठा महाराज, मैंद्रथ स्थित बासिक महासू और बंगाण क्षेत्र के ठडियार स्थित पबासिक महासू के पुजारियों की सेवा लगती है। संवाद
कैसे शुरू होती है चालदा महाराज की 24 वर्ष की यात्रा
- शांटी क्षेत्र-कोटि-देवघार खत के मुंधोल (एक वर्ष), हिमाचल प्रदेश के थ्रोच में (एक वर्ष), जानोगी चोपाल में (एक वर्ष), कोटी कनासर (एक वर्ष), मोहन खत (एक वर्ष), समाल्टा (एक वर्ष), हाजा दसोऊ पसगांव (2.5 वर्ष) वर्ष, मसक खत भरम (एक वर्ष), किस्तुड खत लखोऊ (एक वर्ष), वापस कोटी बावर प्रवास (छह माह)
- पांशी क्षेत्र - हनोल (एक रात), उत्तरकाशी बुटाणु बंगाण पीगंल पट्टी (एक वर्ष), जीवां कोटीगाड (एक वर्ष), बामसु मासमोर पट्टी (एक वर्ष), बितरी गांव फतेहपुर वक्त (दो वर्ष), खसधार हिमाचल प्रदेश (दो वर्ष), भरसाठा धार जुब्बल हिमाचल प्रदेश (एक वर्ष ), हिमाचल प्रदेश में सराजी जुब्बल (एक वर्ष), बुटाणु उत्तरकाशी (एक वर्ष), टडियार (एक रात), हनोल (एक रात)
भाई के यहां बिताते हैं केवल एक रात
चालदा महाराज अपने भाइयों के यहां अधिक समय नहीं ठहरते हैं। वह हनोल में बौठा महासू के मंदिर और बंगाण क्षेत्र के स्थित ठडियार स्थित पबासिक महासू के मंदिर में केवल एक रात ही ठहरते हैं।