जौनसार बावर जनजातीय क्षेत्र के अंतर्गत खत पशगांव के 15 गांवों में पांच दिवसीय दीपावली भिरूड़ी पर्व होलियात से शुरू हो गया है। मंगलवार सुबह भीमल की लकड़ियों से बना होला जलाने के बाद ग्रामीणों ने अखरोट से भिरूड़ी फेंकी। पारंपरिक परिधान जुड्डा पहनकर लोगों ने नृत्य किया। देर शाम तक नाचने और गाने का दौर चलता रहा।
मंगलवार सुबह चार बजे प्रत्येक गांव में लोगों ने होला ढोल-बाजे के साथ जलाया। नाचते-गाते पंचायत आंगन पंहुचे। अपने ईष्ट देवी-देवताओं की पूजा अर्चना की। इसके बाद लोक गीत हारूल जैंता रासो के साथ-साथ जंगाबाजी जैसे विभिन्न प्रकार के नृत्यों का दौर शुरू हुआ। पूरे दिन गांव की महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे सभी पंचायत आंगन में जौनसारी संस्कृति पर आधारित लोकगीत गाते रहे।
दसऊ गांव में सुबह 8.00 बजे भिरूड़ी फेंकी गई। देर रात तक हारूल नृत्य किया गया। चालदा महासू देवता मंदिर में देव दर्शन के लिए भी श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। इसके साथ ही हाजा, गबेला, दोधा, डाडुवा, कितरोली, मलेथा, दुनुवा, सुनोडा, मटियाना, भूपोऊ, कोठा क्वानू, मझंगाव, मैलोथ सहित 15 गांवों में भी दिवाली का भिरूड़ी पर्व बडे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।