I34 फायर स्टेशन और 13 यूनिट में से 16 रहने लायक नहींI
प्रदेश की फायर ब्रिगेड इस वक्त बेहद लचर स्थिति में है। हालात ये हैं कि यहां न तो अफसरों की संख्या पूरी है और न ही भवनों की स्थिति ही ठीक है। फायर सेफ्टी अफसरों की संख्या भी तय से एक तिहाई से कम है।
फायरमैन की बात करें तो यहां बरसों बाद अब जाकर संख्या नियतन के करीब पहुंची है, जो भवन हैं उनमें से कई की हालत ऐसी है कि इन्हें भी बचाव की जरूरत कभी भी पड़ सकती है। कई फायर स्टेशन के नाम तो हैं मगर भवन नहीं है। जमीन मिली है पर बजट नहीं है। दरअसल, फायर ब्रिगेड को फर्स्ट रिस्पोंडर के तौर पर जाना जाता है। यानी किसी भी हादसे और आपदा के वक्त फायर ब्रिगेड की टीम ही मौके पर सबसे पहले पहुंचती है, लेकिन वर्तमान में फायर ब्रिगेड ही आपदाग्रस्त है।
यहां मूलभूत सुविधा यानी भवनों की लंबे समय से कमी चली आ रही है। प्रदेश में कुल 34 फायर स्टेशन हैं। इनमें से छह फायर स्टेशन सिर्फ नाम के हैं। इनके पास अपने भवन हैं ही नहीं। यही नहीं 13 फायर यूनिट हैं, जिनमें से आठ के पास अपने भवन नहीं है। जमीन तो मिल गई है पर इन्हें बनाने के लिए बजट नहीं मिल सका है।
I35 में से 10 एफएसओI
दो साल पहले तक प्रदेश में एक भी एफएसओ यानी फायर सेफ्टी अफसर नहीं था, लेकिन अब जैसे तैसे 10 हो गए हैं। हालांकि, यह संख्या 35 के नियतन से एक तिहाई से भी कम है। इसी तरह सेकंड अफसर एफएसएसओ की संख्या भी निर्धारित से बेहद कम है। प्रदेश में 50 एफएसएसओ के सापेक्ष केवल 19 ही अधिकारी हैं। साथ ही इसी साल फायरमैन की कमी भी जैसे तैसे पूरी हुई है। इस साल के शुरुआत तक केवल 542 फायरमैन मौजूद थे। जबकि, नियतन 998 का है। हालांकि, इसी साल की शुरुआत में 338 फायरमैन की भर्ती हुई, जिनकी अभी ट्रेनिंग चल रही है।
I17 फायर स्टेशन बनाएगा वर्ल्ड बैंकI
मौजूदा समय में जो फायर स्टेशन हैं, उनमें से 17 ऐसे हैं जिनकी हालत रहने लायक नहीं है। ऐसे में अब इन फायर स्टेशन को वर्ल्ड बैंक ने बनाने का जिम्मा लिया है। साथ ही नए फायर स्टेशन भी प्रदेश में बनाए जाने हैं। कुल 13 फायर स्टेशन के निर्माण का प्रस्ताव शासन को विभाग की ओर से भेजा गया है। जल्द ही सभी फायर यूनिट के स्थान पर फायर स्टेशन बनाने की योजना है। हालांकि, इनके पूरे होने में अभी लंबा वक्त लग सकता है।