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Dehradun News: कैंट पुलिस का कारनामा, आठ माह दबाए रही वैज्ञानिक की चोरी की तहरीर

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घटनाओं को छिपाने के मामले में कैंट पुलिस की पंडितवाड़ी चौकी ने हद ही कर दी। आम आदमी तो छोड़ो, वैज्ञानिक के घर हुई चोरी को ही दबा लिया। आठ महीने पहले हुई चोरी का खुलासा तो दूर, अभी तक मुकदमा भी नहीं लिखा। इंतजार बढ़ा तो पीड़ित वैज्ञानिक डीजीपी के दरबार पहुंचे। वहां से पत्र पुलिस के पास पहुंचा तो पुरानी तहरीर को आधार बनाकर तत्काल मुकदमा दर्ज कर लिया।
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चोरी पिछले साल सितंबर में पर्यावरण प्रबंधन निदेशालय में तैनात वैज्ञानिक श्रीचंद्र शर्मा के घर हुई थी। उन्होंने डीजीपी से शिकायत कर बताया कि उनका घर वन अनुसंधान संस्थान परिसर में स्थित है। वह परिवार के साथ 18 से 24 सितंबर 2022 तक शहर से बाहर थे। लौटकर उन्होंने देखा तो मकान के मुख्य दरवाजे का ताला टूटा हुआ था। अंदर आलमारी में रखे करीब छह लाख रुपये के गहने गायब थे। इसकी लिखित शिकायत उन्होंने 26 सितंबर को पंडितवाड़ी पुलिस चौकी में दी। वहां से रिसीविंग भी उन्हें मिल गई। उन्होंने सोचा कि शायद पुलिस इस मामले में जांच कर रही है।



मगर, कुछ दिन पहले जब उन्होंने इस मामले में प्रगति जाननी चाही तो पता चला कि अभी मुकदमा ही दर्ज नहीं हुआ है। मामले में डीजीपी अशोक कुमार ने जिला पुलिस को कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद कैंट थाने में श्रीचंद्र शर्मा की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया गया। वहीं, पंडितवाड़ी पुलिस के इस रवैये को लेकर पूरी दून पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। बता दें कि पुलिस अक्सर चोरी के मामलों को दबाने की कोशिश करती है। कई बार तो चोर पकड़ने के बाद मुकदमे दर्ज किए जाते हैं। आम लोगों की शिकायत पर ज्यादातर ऐसा होता है। लेकिन, यहां तो वैज्ञानिक की ही शिकायत को दबा लिया गया।
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मौजूदा चौकी प्रभारी हाल ही में तैनात हुए हैं। पहले वाले चौकी प्रभारी की चूक सामने आ रही है। मामले में जांच कराई जा रही है। लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। -सरिता डोबाल, एसपी सिटी


समय-समय पर जारी होते हैं सर्कुलर

शिकायतों को दबाने के संबंध में पुलिस अधिकारियों की ओर से समय-समय पर सर्कुलर जारी होते हैं। कहा जाता है कि किसी भी थाने या चौकी में आने वाली शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जाए। पीड़ितों को रिसीविंग दी जाए। चोरी के मामलों में भी तत्काल मौके पर जाकर जांच की जाए और मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की तलाश की जाए। मगर, इन निर्देशों को पुलिस अक्सर धता बता देती है।
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