बच्ची के माता-पिता ने उसे सड़क किनारे नहीं छोड़ा था। बल्कि, पिता खुद उसे गोद में लेकर सड़क किनारे खड़ा था। उसने चाइल्ड हेल्पलाइन को फोन कर जानकारी दी थी कि यह बच्ची उसे यहां पड़ी मिली थी। यह जानकारी उसने शनिवार को बाल कल्याण समिति के सामने पेश होकर दी है। इसकी तस्दीक समिति ने चाइल्ड हेल्पलाइन के कर्मचारियों से भी की, जिन्होंने बच्ची को उसके हाथों से लिया था। बाल कल्याण समिति की ओर से बताया गया कि समिति अध्यक्ष के सामने बच्ची के पिता से विस्तृत पूछताछ की थी। उसने समिति को बताया कि वह गुजरात में नौकरी करता है। उसने युवती के साथ दो साल पहले गुजरात के एक मंदिर में शादी की थी। इसके बाद पिछले साल युवती (बच्ची की मां) पढ़ाई करने के लिए देहरादून आ गई। यहां बच्ची की मां पीजी में रहने लगी। बीच-बीच में युवक भी उससे मिलने आता था। इस बीच वह गर्भवती हो गई। अब जब युवती के प्रसव का समय आया तो सात दिन पहले युवक गुजरात से दून आया था। बच्ची का जन्म बीती दो जुलाई को दून अस्पताल में हुआ। इसके बाद दोनों इस पशोपेश में पड़ गए कि किस तरह से इसको पाला जाएगा। इसी के चलते युवक अपनी दो दिन की बच्ची को लेकर पंत मार्ग पर पहुंच गया। उसने वहीं से चाइल्ड हेल्पलाइन को फोन किया। समिति के अनुसार जिस वक्त चाइल्ड लाइन के कर्मचारी वहां पहुंचे तो युवक बच्ची को गोद में लिए खड़ा था। उसने उन्हें बताया था कि वह यहां से गुजर रहा था तो बच्ची के रोने की आवाज सुनकर उसे उठा लिया। चाइल्ड लाइन के कर्मचारी उसे अपने साथ ले गए और पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने जब नंबर की जांच की तो पता चला कि वह बच्ची का पिता ही था, लेकिन वही खुद उसे लिए खड़ा था यह बात उसने अब बाल कल्याण समिति के सामने बताई, जिसकी तस्दीक चाइल्ड लाइन के कर्मचारियों ने भी।