स्वच्छता के पैमाने पर जिले के गांव नई कहानी लिख रहे हैं। गांवों में स्वच्छता को लेकर जागरूकता और प्रयासों का असर यह है कि ओडीएफ प्लस बनने से जिला चंद कदम दूर रह गया है। जिला जल एवं स्वच्छता समिति (स्वजल) के मुताबिक, जिले के 636 में 627 ग्राम ओडीएफ प्लस बन गए हैं।
विकासनगर के नौ गांवों में ओडीएफ प्लस का कार्य प्रगति पर है जो इस माह पूर्ण हो जाएगा। ओडीएफ प्लस की शर्तों के अनुसार प्रत्येक ब्लॉक में 1-1 कूड़ा उठान वाहन आ गया है। गांवों में सामुदायिक शौचालयों के साथ ही प्लास्टिक वेस्ट निस्तारण को लेकर भी खासे प्रयास किए जा रहे हैं। सहसपुर ब्लॉक को छोड़कर अन्य ब्लाकों में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट स्थापित हो गई है। सहसपुर में भूमि चिह्नित की जा चुकी है।
गांवों को ओडीएफ बनाने के लिए विकास विभाग खासी कवायद कर रहा है। मंगलवार को मुख्य विकास अधिकारी झरना कमठान ने कलेक्ट्रेट में जिला जल स्वच्छता मिशन समिति और जिला जल एवं स्वच्छता समिति (स्वजल) की बैठक में जल जीवन मिशन के कार्यों को 15 मार्च तक पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने जल निगम एवं जल संस्थान कालसी, विकासनगर, देहरादून डिवीजन में कार्य की रफ्तार तेज करने को कहा। उन्होंने निर्देशित किया कि जो कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं, उनकी रिपोर्टिंग आईएमएस पोर्टल पर 100 प्रतिशत एंट्री करें।
PHOTOS: अभी भी जगह-जगह दिख रहे हल्द्वानी हिंसा के जख्म, अधिकतर घरों में लटके ताले; तस्वीरों में देखें हालात
क्या होते हैं ओडीएफ प्लस गांव
ओडीएफ प्लस गांवों में खुले में शौच पर पूर्ण पाबंदी होती है। ग्राम पंचायत में कम से कम एक सामुदायिक शौचालय हो। सभी घरों के साथ ही प्राथमिक विद्यालय, पंचायत घर और आंगनबाड़ी केंद्र में भी शौचालय होना जरूरी है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों को ओडीएफ प्लस बनाया जा रहा है। शौचालय के साथ ही सभी सार्वजनिक स्थानों और कम से कम 80 फीसदी घरों में ठोस और तरल कचरे का प्रबंधन होने पर ही ओडीएफ प्लस घोषित किया जाता है।
छात्र-छात्राओं के लिए बनाए अलग शौचालय
ओडीएफ प्लस के तहत गांवों के आंगनबाड़ी केंद्रों पर छात्र और छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय बनाए गए हैं। सार्वनिक जगहों पर गीले कूड़े के निस्तारण के लिए कूड़ेदान या गड्ढे बनाए गए हैं।
गांवों में बनाए प्लास्टिक कचरा कलेक्शन सेंटरI
ओडीएफ प्लस का सबसे अहम बिंदु है प्लास्टिक कूड़ा निस्तारण। ओडीएफ प्लस गांवों में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन पर खास फोकस किया गया है। प्लास्टिक कचरे को ब्लाक में एक जगह जमा कर प्लास्टिक वेस्ट रिसोर्स मैनेजमेंट सेंटर पर ले जाया जाता है, जहां इसे छंटाई के बाद निस्तारण के लिए भेजा जाता है। प्रत्येक गांव में भी प्लास्टिक कलेक्शन सेंटर बनाए गए हैं।
गांवों को ओडीएफ प्लस बनाने के लिए तेजी से काम चल रहा है। इस वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक सभी गांवों को ओडीएफ प्लस कर दिया जाएगा। अभी जिला ओडीएफ प्लस की प्रथम श्रेणी में है। अगली श्रेणी के पैरामीटरों पर गांवों को ओडीएफ प्लस बनाया जाएगा।
- झरना कमठान, सीडीओ, देहरादून