जांच में सहयोग न करने पर जालसाजी के आरोपी की न्यायालय ने अग्रिम जमानत खारिज कर दी। आरोपी को मुकदमा दर्ज होने के एक महीने बाद अपर जिला न्यायाधीश चतुर्थ की कोर्ट से सशर्त अग्रिम जमानत मिली थी। अब अभियोजन की मांग पर अपर जिला न्यायाधीश महेश चंद्र कुशिवा की कोर्ट ने इस अग्रिम जमानत को खारिज कर दिया।
शासकीय अधिवक्ता राजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि पिछले साल मार्च में दीपांकर मित्तल ने सुखदेव निवासी लुधियाना के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। मित्तल का कहना था कि उनकी नवादा में पैतृक संपत्ति है। उनके पिता और चाचा की मौत के बाद यह संपत्ति उनके नाम पर आ गई। इस बीच सुखदेव ने अपने साथियों के साथ मिलकर इसके फर्जी दस्तावेज बनवा लिए। इनमें दर्शाया गया कि यह जमीन मित्तल के पिता और चाचा से उन्होंने 1980 में खरीदी थी। जबकि, मित्तल परिवार ने इस संपत्ति को कभी बेचा ही नहीं था। इस आधार पर पुलिस ने कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया।
इसके बाद आरोपी सुखदेव ने अपर जिला न्यायाधीश चतुर्थ की कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए प्रार्थनापत्र दिया। इस प्रार्थनापत्र के आधार पर कोर्ट ने सुखदेव को सशर्त अग्रिम जमानत दे दी। शर्त थी कि वह विवेचना अधिकारी को जांच में पूरा सहयोग करेगा। जमीन पर कब्जा लेने का प्रयास नहीं करेगा। अब अभियोजन ने अपर जिला न्यायाधीश चतुर्थ महेश चंद्र कुशिवा की कोर्ट में बताया कि सुखदेव जमानत की शर्तों को नहीं मान रहा है। वह न तो जांच में सहयोग कर रहा है और न ही जमीन पर कब्जा छोड़ने को तैयार है। बार बार मौके पर जाकर जमीन पर कब्जा करने का प्रयास कर रहा है। इस आधार पर आरोपी सुखदेव की अग्रिम जमानत को कोर्ट ने खारिज कर दिया।