शहर कोतवाली पुलिस ने फर्जी वसीयत तैयार कर करोड़ों रुपये की संपत्ति हड़पने के आरोप में कमल प्रसाद, कुमुद वैद्य, उर्वशी और जगराज मान के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। मामला उपासना मेहता की संपत्ति से जुड़ा है। पुलिस को शिकायत देकर आरोप लगाया गया कि कूटरचित दस्तावेज तैयार कर संपत्तियों का अवैध तरीके से हस्तांतरण और विक्रय किया गया। शिकायत के अनुसार, उपासना मेहता वर्तमान में बंगलूरू में रहती हैं। उनकी अनुपस्थिति में देहरादून स्थित संपत्तियों की देखरेख के लिए उन्होंने विकेश सिंह नेगी को नामित किया है। 2023 में उपासना मेहता को जानकारी मिली कि चंद्र बहादुर सिंह अपने पीछे एक पंजीकृत वसीयत छोड़ गए थे, जिसमें उन्होंने अपनी काफी संपत्ति उपासना मेहता के नाम की थी। वसीयत के निष्पादक अधिवक्ता मनोजीत सिन्हा थे।बाद में उन्होंने मूल वसीयत जिला जज न्यायालय में जमा कर स्वयं को निष्पादक पद से अलग करने का अनुरोध किया। आरोप यह है कि चंद्र बहादुर सिंह की मृत्यु के बाद कमल प्रसाद और कुमुद वैद्य ने षड्यंत्र के तहत दो सितंबर 2001 की एक अपंजीकृत वसीयत तैयार कराई, जबकि वास्तविक वसीयत 21 अगस्त 2001 को बनाई गई थी और उसका पंजीकरण एक सितंबर 2001 को हो चुका था। शिकायत में दावा किया गया है कि कथित फर्जी वसीयत के आधार पर चंद्र बहादुर सिंह की संपत्तियों को उनकी माता पुष्पा प्रसाद और मौसी पद्मा कुमारी के नाम दर्शाकर बाद में बेच दिया गया। इस वसीयत में उर्वशी और जगराज मान को गवाह बनाया गया।शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी पहले भी जालसाजी के मामलों में संलिप्त रहे हैं। उपासना मेहता की ओर से उनके वकील विकेश सिंह नेगी ने पुलिस से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर कथित फर्जी वसीयत, बैंक खाते के लेनदेन और संपत्ति के हस्तांतरण की जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। शहर कोतवाली प्रभारी कैलाश चंद भट्ट ने बताया कि शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।