नियमों के खिलाफ जाकर दी गई दो लोगों की जमानत को एडीजे द्वितीय महेश चंद कौशिबा की कोर्ट ने रद्द कर दिया। दोनों जानलेवा हमले के आरोपी हैं। दोनों को मजिस्ट्रेट कोर्ट ने जमानत दी थी। जबकि, आईपीसी की धारा 307 (जानलेवा हमला) में जमानत देने का अधिकार केवल सत्र न्यायालयों को है। इस धारा के सभी मुकदमों को सत्र कोर्ट में ही सुना जाता है।
जानकारी के अनुसार कोतवाली पुलिस ने दो पक्षों के झगड़े में मारपीट, गाली गलौज और जान से मारने की धमकी देने का मुकदमा दर्ज किया था। इसमें रिंकू सिंह, मोनू सिंह आदि को आरोपी बनाया गया। पुलिस ने जांच के बाद इसमें जानलेवा हमला करने की धारा आईपीसी 307 भी जोड़ दी थी। इन दोनों ने मजिस्ट्रेट कोर्ट में जमानत के लिए प्रार्थनापत्र दिया, जिस पर 14 अक्तूबर 2022 को सुनवाई के बाद कोर्ट ने जमानत दे दी। बाद में अन्य आरोपियों गणेश सिंह और विशाल सिंह को भी जमानत मिल गई।
इनमें से अभियोजन की ओर से रिंकू सिंह और मोनू सिंह की जमानत को चुनौती दी गई। मामला एडीजे द्वितीय महेश चंद कौशिबा की अदालत में चला। इस पर शुक्रवार को कोर्ट ने दोनों आरोपियों की जमानत खारिज कर दी। न्यायालय ने माना है कि आईपीसी 307 के मुकदमे में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने नियमों के विरुद्ध जाकर जमानत दी थी। इस मामले में विशाल सिंह और गणेश सिंह तब तक जमानत पर रहेंगे, जब तक कि अभियोजन की ओर से इसके विरुद्ध कोई प्रार्थनापत्र प्रस्तुत नहीं किया जाता।