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Iशिक्षकों ने सरकार और अधिकारियों पर लगाया अनदेखी का आरोपI
विभिन्न मांगों को लेकर पिछले कई दिनों से शिक्षा निदेशालय में धरना दे रहे अतिथि शिक्षकों का बुधवार को गुस्सा फूट पड़ा। अतिथि शिक्षकों ने सड़कों पर उतरकर प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सचिवालय की ओर कूच किया। लेकिन पुलिस ने शिक्षकों को सचिवालय से पहले ही बैरिकेड लगाकर रोक दिया। जिससे अतिथि शिक्षकों एवं पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई। इस दौरान पुलिस ने कई शिक्षकों को गिरफ्तार भी किया गया। जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। इस दौरान अतिथि शिक्षकों ने बरसात में पहुंचे हजारों शिक्षकों की सुध नहीं लेने पर सरकार के खिलाफ रोष जताया है।
गौरतलब है कि माध्यमिक अतिथि शिक्षक संघ विगत दो अगस्त से ननूरखेड़ा स्थित शिक्षा निदेशालय में अनिश्चितकालीन धरना दे रहा है। शिक्षकों का कहना है कि करीब डेढ़ साल से कुमाऊं और गढ़वाल में अतिथि शिक्षकों को नौकरी से बाहर कर दिया गया था। जिन्हें वापस नौकरी पर नहीं रखा गया। शिक्षकों का कहना है कि उन्हें 40 हजार से कम वेतन किसी सूरत में स्वीकार नहीं है। इसके साथ अतिथि शिक्षक मांग कर रहे हैं कि उनके पदों को रिक्त न माना जाए और उनके पदों को सुरक्षित किए जाने की भी मांग की जा रही है। इन्हीं मांगों को लेकर धरना दे रहे अतिथि शिक्षकों का गुस्सा बुधवार को फूट पड़ा।
पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत सचिवालय कूच में शामिल होने के लिए बुधवार की सुबह ही विभिन्न जिलों से काफी मात्रा में अतिथि शिक्षक धरना स्थल पर पहुंचे। ननूरखेड़ा स्थित शिक्षा निदेशालय से अतिथि शिक्षकों ने जुलूस के रूप में सचिवालय की ओर कूच किया। परेड ग्राउंड होते हुए जैसे ही शिक्षक सचिवालय के पास पहुंचे तो यहां पहले से ही भारी मात्रा में मौजूद पुलिस बल ने बैरिकेड लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इससे शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
सचिवालय जाने से रोके जाने पर पुलिस के साथ जमकर नोकझोंक हुई। प्रदर्शन और नारेबाजी कर रहे शिक्षकों को पुलिस ने हिरासत में लेना शुरू कर दिया। करीब दो बसों में शिक्षकों को गिरफ्तार कर अलग-अलग जगह ले जाया गया। जिन्हें करीब दो-तीन घंटे बाद छोड़ दिया गया। इस मौके पर विक्रम रावत, ललित बिष्ट, आशीष जोशी, विजय पोखरियाल, अंजलि सिंह, विक्की रावत, दौलत जगूड़ी, अंजलि सिंह, शिखा रावत आदि मौजूद रहे।
Iमांग पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा : भट्टI
संघ के प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक भट्ट ने कहा कि एक ओर प्रदेश के अन्य शिक्षक तबादलों के लिए भटक रहे हैं तो वहीं अतिथि शिक्षक सड़कों पर आंदोलन के लिए मजबूर है। आंदोलन के चलते स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित है। सरकार को सुनने को तैयार नहीं है। कहा कि अतिथि शिक्षकों का वेतन पहले से की कम है। इसके बाद भी काउंसिलिंग से तबादले करके हजारों अतिथि शिक्षकों को नौकरी से प्रभावित कर दिया गया। जिसके चलते शिक्षक आंदोलन करने को मजबूर हैं। कहा कि बरसात में हजारों शिक्षक सड़काें पर उतरे। लेकिन किसी जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी ने उनकी सुध नहीं ली। जिससे शिक्षकों में भारी रोष है। उन्होंने कहा कि जब तक मांग पूरी नहीं होगी। तब तक आंदोलन जारी रहेगा।