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Dehradun: शराब को हाथ तक नहीं लगाते कोटा डिमाेऊ और बोरी गांव के लोग, पीछे है ये मान्यता

Mon, 09 Oct 2023 06:51 PM IST
देहरादून ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

मान्यता के अनुसार जहां भगवान परशुराम का वास होता है, वहां नशा पूरी तरह से वर्जित होती है। स्थानीय लोग तो नशा करते ही नहीं, बाहर से भी लोग मंदिर और भगवान परशुराम की महिमा सुन कर नशा मुक्ति के लिए आते हैं।
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शराब - फोटो : सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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किशोर और युवा नशे के दलदल में फंसकर अपना स्वर्णिम भविष्य और माता-पिता की उम्मीदों को चकनाचूर कर रहे हैं। लेकिन कालसी तहसील क्षेत्र के कोटा डिमोऊ और बोरी गांव के लोग शराब या अन्य नशे को हाथ तक नहीं लगाते हैं। इसके पीछे कोई बंदिश नहीं बल्कि धार्मिक मान्यता है। दोनों गांवों के भूमि देवता भगवान परशुराम महाराज है।

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मान्यता के अनुसार जहां भगवान परशुराम का वास होता है, वहां नशा पूरी तरह से वर्जित होती है। स्थानीय लोग तो नशा करते ही नहीं, बाहर से भी लोग मंदिर और भगवान परशुराम की महिमा सुन कर नशा मुक्ति के लिए आते हैं। यहां नशा मुक्ति के लिए केवल एक बार संकल्प लेना पड़ता है। माना जाता है कि संकल्प लेने के बाद नशे की इच्छा ही समाप्त हो जाती है। अगर कोई संकल्प तोड़ता है तो वह पागल हो जाता या उसके साथ अनहोनी घटित होती है।

तीन हजार लोगों में से एक भी नहीं करते नशाI
परशुराम महाराज मंदिर कोटा डिमोऊ के बजीर और मंदिर समिति के अध्यक्ष जवाहर सिंह चौहान बताते हैं कि गांव की आबादी करीब तीन हजार है। यहां कोई भी व्यक्ति शराब आदि का नशा नहीं करता है। शराब पीना तो दूर घर में भी नहीं रखी जाती है। यह परंपरा पुराने समय से चली आ रही है। कोटा डिमोऊ और बोरी में अगर कहीं बारात आती है तो पहले आगाह कर दिया जाता है कि गांव की सीमा में कोई शराब लेकर नहीं आएगा।

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मनोकामना सिद्धि पर भगवान खुद जाते है भक्त के घर

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जवाहर सिंह चौहान बताते है कि मंदिर में भगवान परशुराम महाराज की पालकी और उनकी माता रेणुका देवी के चिह्न हैं। कई लोग मनोकामना सिद्धि के लिए मंदिर में आते हैं। वह मनोकामना पूरी होने पर देवता को अपने साथ ले जाने का वचन देते हैं। बताया कि मनोकामना रखने वाला श्रद्धालु एक पुर्जी (लाल कपड़े में चावल को बांधकर) अपने घर के शुद्ध स्थान पर रख लेता है। बताया कि मनोकामना पूरी होने पर देवता पालकी सहित भक्त के घर में जाकर एक दिन प्रवास करते हैं, वहीं उनकी पूजा भी होती है।

भगवान परशुराम हमारे इष्ट देव हैं। जीवन में कभी नशा नहीं किया। कभी इच्छा भी नहीं होती है। दूसरे लोग पूछते है और कुछ मंदिर में संकल्प लेने के लिए भी आते हैं। नशे के बिना जीवन बहुत अच्छा होता है।
- सोनू चौहान, स्थानीय युवा

हमारे यहां गांव में कोई भी नशा नहीं करता है। हम कहीं बाहर भी जाते है तो नियम का पूरा पालन करते हैं। यह आस्था का विषय है, इसमें किसी तरह की कोई जोर जबरदस्ती नहीं होती है। नशा भविष्य को बर्बाद कर देता है।
- वीरू चौहान, स्थानीय युवा
हमारे यहां कोई नशा नहीं करता है। देवता पर विश्वास हमें नशे से दूर रखता है। अगर सभी जगह भगवान में आस्था रख दुर्व्यसनों से दूर रहा जाए तो सभी तरह के अपराध और गलत काम स्वत: बंद हो जाएंगे। युवा नशे से दूर रहकर अपने भविष्य को बचाएं।
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- कांति चौहान, स्थानी युवा

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