बच्ची को अश्लील वीडियो भी दिखाता था। शिक्षिका दया शैलाकोटी ने भी बच्ची से हो रहे इस व्यवहार को उजागर नहीं किया। बल्कि बच्ची को धमकी दी कि ऐसी बातें किसी को बताई तो बिच्छू (घास) लगाकर स्कूल से निकाल दिया जाएगा। इस मामले में पीड़िता के ताऊ ने लमगड़ा थाने में मामला दर्ज कराया था। अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता गिरीश चंद्र फुलारा, सहायक शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) शेखर चंद्र नैलवाल और विशेष लोक अभियोजक भूपेंद्र कुमार जोशी ने मामले की पैरवी की।
निर्भया प्रकोष्ठ की अधिवक्ता अभिलाषा तिवारी ने भी सहयोग किया। मामले की सुनवाई के बाद विशेष सत्र न्यायाधीश डा. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने आरोपी शिक्षक मुकेश कुमार सहगल को दोषी पाया, जबकि शिक्षिका दया शैलाकोटी पत्नी दीप चंद्र निवासी गोलनाकरड़िया तहसील अल्मोड़ा को धारा 323, 504 और 21 (ए) पोक्सो एक्ट में दोषी पाया। न्यायालय ने राज्य सरकार को पीड़िता के सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास के लिए सात लाख रुपये दिए जाने के आदेश पारित किए और कहा कि यदि पूर्व में पीड़िता को कोई धनराशि दी गई है तो वह इसमें से समायोजित की जाएगी।
दोषी नंबर 1- मुकेश कुमार सहगल
कोर्ट ने धारा 376(2) में आजीवन कारावास, 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई और कहा कि आरोपी अंतिम सांस तक जेल में रहेगा। धारा 67 (ए) आईटी एक्ट में पांच साल की कठोर सजा और 50 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया।
दोषी नंबर 2- प्रधानाध्यापिका दया शैलाकोटी
कोर्ट ने धारा 323 में एक साल की सजा और एक हजार रुपये अर्थदंड, धारा 504 में दो साल की सजा और 10 हजार रुपये अर्थदंड, धारा 21 (2) पॉक्सो एक्ट में एक साल की सजा और दस हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है।