पहली कॉल केपी आहूजा, अधिकारी मैनेजमेंट सिक्योरिटी विभाग वित्त मंत्रालय (नई दिल्ली) के नाम से आई थी और उसने चेक से 2.86 लाख रकम कुरियर के जरिये दिल्ली के एक पते पर भेजने की बात कही। इस पर उन्होंने कुरियर से चेक भेज दिया। इसके बाद विराज डोगरा, वरिष्ठ अधिकारी लेखा अधिकारी, वित्त मंत्रालय भारत सरकार (नई दिल्ली) के नाम से कॉल आई। इस कॉल के बाद उन्होंने 98 हजार एक खाते में जमा कराए।
तीसरी बार कॉल सुनील दुग्गल, एरिया ऑफिसर, वित्त मंत्रालय फंड रीलिजिंग विभाग (नई दिल्ली) के नाम से आई। उसके कहने पर उन्होंने खाते में 7.50 लाख रुपये डलवाए। चौथी बार विक्रम सिंह वर्धमान, आरबीआई अधिकारी वेरीफिकेशन विभाग (नई दिल्ली) के नाम से कॉल आई। इस बार अधिकारी ने उनसे खाते में चार लाख रुपये डलवाए। इसके बाद पांचवीं कॉल अजय त्यागी, एरिया ऑफिसर वित्त मंत्रालय भारत सरकार (नई दिल्ली) के नाम से आई। इस कॉल के बाद उन्होंने सात लाख रुपये अलग-अलग खाते में डाले। इस तरह उनसे 23.34 लाख की रकम अलग-अलग खातों में डलवाई गई।
उन्हें 26 मार्च, 2019 तक उनके खाते में शेयर आफर के 60 लाख रुपये डालने का भरोसा दिलाया गया। निर्धारित समय तक रुपये खाते में नहीं आए तो उन्होंने उनके नंबर पर कॉल की। इस पर पांचों का नंबर बंद आया। उन्होंने कई बार नंबर मिलाए, लेकिन हर बार नंबर बंद मिले। पीड़ित ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की। कोतवाली प्रभारी अमरजीत सिंह ने बताया कि तहरीर के आधार पर पांचों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया है और मामले की जांच की जा रही है।