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पुलिस लूटकांड: एसटीएफ ने शुरू की जांच, मुख्य अभियुक्त का नहीं लग पा रहा सुराग 

Mon, 15 Apr 2019 11:41 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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पुलिस महानिरीक्षक की गाड़ी का इस्तेमाल कर रुपयों भरा बैग लूटने के मामले में तीसरे दिन एसटीएफ ने जिला पुलिस से विवेचना ग्रहण कर ली। अधिकारियों के मुताबिक अभी तक जुटाए गए साक्ष्यों का अवलोकन शुरू कर दिया गया है, जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, अभी तक मुख्य अभियुक्त अनुपम शर्मा का कोई सुराग हाथ नहीं लग सका है।

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घटना को 10 दिन का समय बीत चुका है, लेकिन जांच को आगे बढ़ने के बजाय सिर्फ फाइलों को ही दफ्तर दर दफ्तर घुमाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि पुलिस ने इस मामले में सीसीटीवी फुटेज से लेकर आरोपियों की काल रिकार्ड और मोबाइल लोकेशन भी हासिल कर ली थी। अब नई जांच एजेंसी (एसटीएफ) नए सिरे से इन साक्ष्यों का अवलोकन करेगी।

जाहिर है इसमें भी कई दिन लग सकते हैं। ऐसे में चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं कि यह सब आरोपियों को सजा दिलाने के लिए नहीं, बल्कि खाकी के दाग धुलने के लिए किया जा रहा है। इस तरह के मामले पहले भी कई बार देखने में आए हैं। जहां पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों पर लगे आरोपों की जांच में बेवजह देरी की गई और फिर आरोपियों को बच निकलने का मौका मिल गया।

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क्या है मामला

आरोप है कि चार अप्रैल को दारोगा दिनेश नेगी ने अपने दो साथी पुलिसकर्मियों के साथ आईजी की गाड़ी में बैठकर घटना को अंजाम दिया था। इन पुलिसकर्मियों ने प्रापर्टी डीलर अनुरोध पंवार से रुपयों भरा बैग लूटा था। इन पुलिसकर्मियों ने आचार संहिता का हवाला देते हुए रुपयों भरे बैग को जब्त करने का नाटक किया और फिर बैग लेकर फरार हो गए। इस मामले में चार दिन पूर्व ही मुकदमा दर्ज किया गया था। जबकि, अगले दिन ही जांच एसटीएफ को सौंप दी गई। 

विवेचना ग्रहण कर ली गई है। जिला पुलिस से जो साक्ष्य मिले हैं उनका अवलोकन शुरू कर दिया गया है। जैसे ही कोई लीड मिलती है उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। 
- स्वतंत्र कुमार सिंह, एएसपी एसटीएफ

आम लोगों में चर्चा का विषय बना लूटकांड
पुलिस का लूटकांड इन दिनों आम जनता के बीच चर्चाओं का विषय बना हुआ है। जनता भी इसमें पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या पुलिस आम अपराधी के खिलाफ भी इसी तरह का व्यवहार करती? क्या इतना मौका एक आम अपराधी को दिया जाता, जितना कि पुलिस अपने बीच के लोगों को दे रही है? अधिकारी की गाड़ी के इस्तेमाल किए जाने के भी कई अर्थ जनता निकाल रही है। कुल मिलाकर इस मामले में पुलिस और सरकारी सिस्टम की जमकर आलोचना हो रही है।
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