डेढ़ साल पहले तीन स्तरों पर एसटीएफ के अंतर्गत प्रदेश स्तर पर एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन किया गया है। जिला और थाना स्तरों पर अलग-अलग फोर्स बनी है। जिलों में पुलिस स्टाफ को फोर्स में शामिल किया जाना है। जबकि प्रदेश स्तर की टास्क फोर्स में अलग से पद सृजित किए जाने थे। लेकिन अब तक पद सृजित नहीं हुए हैं।
नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई के लिए बनी प्रदेश स्तर की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) के गठन के डेढ़ साल बाद भी पद सृजित नहीं हो सके हैं। अब एसटीएफ ने पुलिस मुख्यालय को पद सृजन के लिए प्रस्ताव भेजा है।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2025 तक उत्तराखंड को नशा मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। इसी क्रम में डेढ़ साल पहले तीन स्तरों पर एसटीएफ के अंतर्गत प्रदेश स्तर पर एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन किया गया है। जिला और थाना स्तरों पर अलग-अलग फोर्स बनी है। जिलों में पुलिस स्टाफ को फोर्स में शामिल किया जाना है। जबकि प्रदेश स्तर की टास्क फोर्स में अलग से पद सृजित किए जाने थे। लेकिन अब तक पद सृजित नहीं हुए हैं।
करीब आठ माह पहले एसटीएफ से 20 पदों के सृजन के लिए पुलिस मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा था। इनमें कुछ इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर के अलावा सिपाही स्तर के कर्मचारी शामिल होने हैं। इनमें एक यूनिट गढ़वाल और दूसरी कुमाऊं में बननी है। फिलहाल उत्तराखंड एसटीएफ का स्टाफ ही इस फोर्स में काम कर रहा है। पिछले दिनों एएनटीएफ ने प्रदेश स्तर पर कई
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केंद्र सरकार के निर्देश पर सबसे पहले हुआ था गठनI
केंद्र सरकार के निर्देश पर उत्तराखंड में सबसे पहले त्रिस्तरीय एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन किया गया था। अगस्त 2022 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसकी मंजूरी दी थी। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स प्रदेश के दोनों रेंज में काम करती है। ये दोनों यूनिट नाको कॉओडिनेशन सेंटर (एनकॉर्ड) की निगरानी में काम करती है। एएनटीएफ को ड्रग्स तस्करों पर कार्रवाई के साथ संपत्तियां जब्त करने का अधिकार भी है।
पुलिस की ओर से शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। इस पर शासन में मंथन चल रहा है। पिछले दिनों एसीएस गृह के साथ हुई बैठक में भी इस पर विचार-विमर्श हुआ था। जल्द ही शासन स्तर पर एएनटीएफ पद सृजन पर फैसला लिया जा सकता है। - एपी अंशुमान, एडीजी कानून व्यवस्थाI