सरकार और दल कोई भी हो, सभी विनाश में लगी हुई है। इसके लिए किसी एक दल को दोष देना बेकार है। हम किसी दल से जुड़े होते हैं तो कहते हैं कि ये सरकार ठीक है। जबकि हमारा दायित्व है कि काेई भी सरकार किसी भी दल की हो चाहे विरोधी हो या आपके अपने दल की, अगर वो गलत करे तो उसे गलत कहना होगा। जिस तरह विकास हो रहा है, इसकी नीति दूरदर्शिता के साथ नहीं है। चार दिन की चांदनी के बाद लोगों को ही इसका नुकसान भुगतना होगा। मशाल लेकर समाज में बदलाव लाने की जरूरत है, तभी जैसा लोग चाहेंगे सरकार भी वैसा ही करेगी। ये बातें सोनम वांगचुक ने नगर निगम में आयोजित कार्यक्रम में कही। बुधवार को नगर निगम के टाउन हॉल में हिमालय बचाओ आंदोलन और पर्वतीय नव जीवन मंडल आश्रम की ओर से पद्मविभूषित सुंदरलाल बहुगुणा की चौथी पुण्यतिथि पर हिमालय प्रहरी कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें भारतीय इंजीनियर, शिक्षा सुधारक और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। उन्होंने भारत की सरकार और राजनीति को मां की ममता के एक बेहतर उदाहरण से समझाया। कहा कि दलों को उनके गलत कामों के लिए ताली बजाकर सहयोग करने की बजाय उनका साथ मत दें। आप किसी के प्रति वफा रखते हैं तो सच्ची वफा रखें। शुभचिंतक वही है जो सही को सही कहे और गलत को गलत कहे। इच्छाएं ही मनुष्य के विनाश का कारण बनती है। शहर की अय्याशी के लिए गांव के जीवन को उजाड़ा जा रहा है। शहरों में जरूरत भी नहीं, लेकिन बड़ी संख्या में लोग घरों में एसी लगा रहे हैं। वहीं, जनकवि अतुल शर्मा ने नदी तू बहती रहना गीत की सुंदर प्रस्तुति दी। स्व. सुंदरलाल बहुगुणा के पुत्र राजीव नयन बहुगुणा ने कहा कि वैज्ञानिक ही अंधेरे से विकास को जगमग संसार में लाए, वही आज प्रकृति के दुश्मन बने हुए हैं। विश्व के पहाड़ संकट में हैं। कहा कि वह सोनम वांगचुक को अपने पिता की एक भुजा और सिर मानते हैं। इस मौके पर कमला पंत, समीर रतूड़ी, मधु पाठक, अरविंद आदि मौजूद रहे।