जहां एक तरफ केंद्र सरकार व राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का प्रयास है कि प्रस्तावित राजमार्गों का निर्माण जल्द से जल्द हो। वहीं, राजमार्ग के लिए जमीनों के अधिग्रहण की रफ्तार काफी धीमी है। जिलाधिकारी सोनिका की अध्यक्षता में राष्ट्रीय राजमार्गों से संबंधित भूमि अधिग्रहण को लेकर समीक्षा बैठक की गई। समीक्षा बैठक में यह बात सामने आई कि देहरादून-पांवटा साहिब राष्ट्रीय राजमार्ग-72 के लिए अब तक 21 गांवोें में से महज सात गांव की जमीन का अधिग्रहण किया गया है।
समीक्षा बैठक में भूअध्याप्ति अधिकारी शैलेंद्र नेगी ने बताया कि 21 गांवों में से सात गांवों की भूमि का अधिग्रहण किया गया है। जबकि दो गांवों में शासकीय भूमि है। जबकि बाकी गांवों में अधिग्रहण की प्रकिया जारी है। जमीन अधिग्रहण की एवज में अब तक 135 करोड़ रुपये का मुआवजा भी दिया जा चुका है। मसूरी में पस्तावित सुरंग के बारे में एनएचएआई के परियोजना निदेशक पीके मौर्य ने बताया कि परियोजना के संबंध में अधिसूचना प्रकाशित की जा चुकी है। इसी प्रकार ऋषिकेश-डोईवाला सड़क चौड़ीकरण के तहत भूमि अधिग्रहण की सभी प्रक्रिया पूरी कर ली गई हैं। जिस पर जिलाधिकारी ने परियोजना निदेशक को अधिसूचना प्रकाशित करवाने के निर्देश दिए।
माजरा-आशारोड़ी परियोजना के संबंध में कार्यों में तेजी लाने और प्रभागीय वनाधिकारी देहरादून को गैर फलदार वृक्षों का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों को योजनाओं के लिए जमीनों के अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी से पूरी करने की हिदायत दी। साथ ही निर्देशित किया कि जिन कास्तकारों, भू-स्वामियों की जमीनों का अधिग्रहण किया जाना है, उन्हें जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाए। बैठक में अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) डॉ. शिव कुमार बर्नवाल, परियोजना निदेशक एनएचएआई पीके मौर्य, विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी एवं उप जिलाधिकारी ऋषिकेश एसएस नेगी, एनएचएआई प्रबंधक सुनील सिसोदिया, उपजिलाधिकारी विकासनगर विनोद कुमार, पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार आदि मौजूद रहे।