खत शैली के दोहा गांव की अविवाहित ध्यातुड़ियों (बेटियां) ने महासू देवता को चांदी की डोरियां और विवाहित ध्यातुड़ियों ने चांदी का धूप नियारा अर्पित किया। उन्होंने महासू देवता से अपने परिवार की मंगलकामना के लिए प्रार्थना की। इस मौके पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य किया। मंदिर परिसर में भंडारे का भी आयोजन किया गया।
सुबह करीब 10 बजे दोहा गांव की 76 विवाहित व अविवाहित ध्यातुड़ियों ने गांव में स्थित नवनिर्मित महासू देवता के मंदिर में विराजमान महासू देवता को करीब 1 किलोग्राम वजन की चांदी की डोरिया अर्पित कीं। विवाहित महिलाओं ने चांदी का धूप नियारा भेंट किया। अविवाहित ध्यातुड़ियों ने द्वार कयलु देवता और काली माता को चांदी के छत्र भेंट किए।
जौनसारी वेशभूषा में सजी गांव की विवाहित व अविवाहित ध्यातुड़ियों से पूरा मंदिर प्रांगण सुसज्जित नजर आ रहा था। ध्यातुड़ियों ने जैंता, रासो और हारूल नृत्य किया। उसके बाद भंडारे और प्रसाद को ग्रहण किया।
गांव की ध्यातुड़ियां चांदी की डोरियों और धूप नियारा को 24 नवंबर की सुबह गांव से हनोल स्थित महासू धाम ले गई थीं। यहां से 26 नवंबर की शाम को वह गांव पहुंचे।
इस मौके पर पंडित विद्यादत्त जोशी, महासू मंदिर समिति के अध्यक्ष चमन सिंह चौहान, चालदा माहसु मंदरि समिति खत स्याणा राजेंद्र सिंह तोमर, ब्लाक प्रमुख मठौर सिंह चौहान, राजेंद्र चौहान, नारायणी देवी, राधा देवी, सुंदला देवी, मुन्नी देवी, कृति देवी, सरला देवी, नीशा, सुनीता चौहान आदि उपस्थित रहे।