डाकपत्थर रोड स्थित मैदान में श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ समिति की ओर से आयोजित श्रीराम कथा के दूसरे दिन वृंदावन से पधारे कथा व्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज ने कहा कि शास्त्रों में जिस अचारण को निषेध बताया गया है, उसे न करने वाला वाला ही गुरु है। गुरु के चरण पूजनीय होते हैं। श्रद्धा को कभी विचलित नहीं किया जा सकता है। श्रद्धा को धारण किया हुआ व्यक्ति ही धर्म की रक्षा कर सकता है। कहा कि वाल्मिकी जी मरा मरा जपते हुए महर्षि हो गए अर्थात उन्होंने नारायण को प्राप्त कर लिया। श्रद्धा से किए गए कर्म को 100 प्रतिशत सफलता मिलती है। गुरु के वचनों के प्रति श्रद्धा रखनी चाहिए। कथा सुनने के लिए श्रद्धा और निश्चल बुद्धि जरूरी है। इस दौरान भजनों पर श्रद्धालु जमकर झूमे। इस मौके पर मुख्य यजमान विजय तोमर, नीरू तोमर, मनोज गुप्ता, नगर पालिकाध्यक्ष शांति जुवांठा, विपिन गर्ग, सतीश जैन, प्रवीण गर्ग, शिव गर्ग, अरुण मित्तल, संदीप महावर, पंकज गौड़ आदि मौजूद रहे।