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विभाग की 26 और 16 अनुबंधित बसें हैं रुड़की में , नियमित चालक आठ व परिचालक हैं 22
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Iरुड़की रोडवेज बस स्टैंड इस समय चालक और परिचालकों की कमी से जूझ रहा है। इसके चलते कई बसें बेड़े में ही खड़ी रहती हैं। ऐसे में यात्रियों को समय पर बसें नहीं मिल पा रही हैं।
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Iरुड़की रोडवेज बस अड्डे में इस समय विभाग की 22 और अनुबंधित 16 बसें हैं। रुड़की में यात्रियों की संख्या के हिसाब से इन बसों की संख्या बेहद कम है। ऊपर से इनमें से कुछ बसें बेड़े से बाहर ही नहीं निकलती हैं। इसकी मुख्य वजह रोडवेज में चालक और परिचालकों की संख्या बसों की संख्या के मुकाबले बेहद कम होना है। इस समय रोडवेज में नियमित चालक आठ और 22 परिचालक हैं। इसके अलावा विशेष श्रेणी के 22 चालक-परिचालक हैं।
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Iवहीं, 16 अनुबंधित बसों के साथ निगम को 14 चालक-परिचालक मिले हुए हैं। ऐसे में कुल मिलाकर डिपो में 66 चालक-परिचालक हैं जबकि 38 बसों को नियमित चलाने के लिए ही कम से कम 80 चालक-परिचालकों की जरूरत है। इस स्थिति में लंबी दूरी जैसे दिल्ली-चंडीगढ़ या हरियाणा का एक चक्कर लगाने के बाद चालक-परिचालक दूसरी बस पर नहीं जा सकता है। चालक और परिचालकों के अभाव में लंबी दूरी तय करके आने वाली बस को मजबूरी में अगले दिन तक बेड़े में ही खड़ा रखना पड़ता है।
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Iहर दिन हो रहा लाखों का नुकसान
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Iचालक और परिचालकों की कमी के चलते छह से आठ बसेें आए दिन डिपो में ही खड़ी रहती हैं। इस समय यात्रा सीजन चल रहा है, इसके बावजूद डिपो चाहकर भी बसों का संचालन नहीं कर पा रहा है। उधर हाल ही में शुरू हुई श्री खाटू श्याम दरबार के लिए बस को नियमित चलाने पर विभाग का पूरा फोकस है। इस बस के लिए पहले से ही चार चालक और परिचालकों को रिजर्व में रखना पड़ता है। इस स्थिति में बसों के बेड़े में खड़े रहने से आए दिन निगम को लाखों का नुकसान झेलना पड़ रहा है। स्थानीय अधिकारी कई बार डिपो में नियमित नहीं तो संविदा या विशेष श्रेणी के चालकों व परिचालकों को रखने की मांग कर चुके हैं।
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रोडवेज में इस समय बसों की संख्या के मुकाबले चालक और परिचालकों की संख्या कम है। डिपो में चालक और परिचालकों के पद निर्धारित नहीं होते हैं। चालक-परिचालक बसों की संख्या के अनुसार ही बढ़ाए जाते हैं। मुख्यालय को चालकों और परिचालकों की समस्या से अवगत कराया गया है।
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- सुरेश चंद चौहान, प्रभारी एआरएम, रुड़की डिपोI