विधि विधान से पूजा अर्चना के बाद शिलगूर महाराज की पालकी को खत सिलगांव के देऊ गांव में बने नवनिर्मित मंदिर के गर्भगृह में विराजमान कराया गया। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने देव दर्शन कर मन्नतें मांगी। मंदिर परिसर दिन भर शिलगूर महाराज के जयकारों से गूंजता रहा। पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं और पुरुषों ने नृत्य किया।
देऊ गांव में देवता का प्राचीन मंदिर था। इसकी जगह खत के लोगों ने सामूहिक प्रयास से देवता के लिए नए मंदिर का निर्माण कराया है। मार्च माह में देवता की पालकी को शाही स्नान के लिए हरिद्वार ले जाया गया था। 25 जून को पालकी को हिमाचल के चूडधार शाही स्नान के लिए ले जाया गया। बीते बुधवार को चूडधार से शाही स्नान के बाद देव पालकी पजिटिलानी गांव पहुंची थी। जहां रात्रि प्रवास के बाद बृहस्पतिवार की सुबह पालकी ने मंदिर के लिए प्रस्थान किया।
करीब 11 बजे देव पालकी जिसोऊ, सुरेऊ, भंजरा गांव होते हुए देऊ गांव पहुंची। जहां पालकी की विशेष पूजा अर्चना की गई। पालकी पर लोगों ने पुष्प और चावल की वर्षा की। बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने पालकी के दर्शन किए। शाम करीब चार बजे पालकी और देव चिह्नों को मंदिर के गर्भगृह में विराजमान कराया गया। देर शाम तक दर्शन के लिए मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। इस मौके पर देव पुजारी रतिराम शर्मा, मंदिर समिति अध्यक्ष संतराम चौहान, आरएस चौहान, माया राम चौहान, संतन सिंह चौहान, चमन सिंह चौहान, बलवीर सिंह चौहान, अजब सिंह चौहान आदि मौजूद रहे।
एक करोड़ से हुआ है मंदिर का निर्माण
खत सिलगांव के देऊ गांव में 62 सरकारी कर्मचारियों और गांव के 40 से अधिक परिवार के सहयोग से मंदिर का निर्माण किया गया है। कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष संतन सिंह चौहान ने बताया कि मंदिर निर्माण में करीब एक करोड़ रुपये का खर्च आया है। देवदार की लकड़ी से तीन मंजिला मंदिर का निर्माण किया गया है। मंदिर में नक्काशी की गई है।