चूंकि, तहरीर में युवती ने घटनास्थल शांतिकुंज बताया था, इसलिए दिल्ली पुलिस ने दोनों के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज कर तफ्तीश के लिए हरिद्वार भेज दिया था। शनिवार को एसएसपी ने मुकदमे की जांच के लिए मीना आर्या को नामित किया था।
हरिद्वार कोतवाली पुलिस ने रविवार को मुकदमे से जुड़े सभी दस्तावेजों को जांच अधिकारी मीना आर्या को सौंप दिए। सीओ सिटी अभय प्रताप सिंह ने बताया कि वर्ष 2010 में जब की घटना है, तब पीड़िता नाबालिग थी। लिहाजा मुकदमे में पॉक्सो एक्ट बढ़ाने को लेकर पुलिस असमंजस में है। इसकी एक वजह, पॉक्सो एक्ट का वर्ष 2012 में लागू होना है।
लिहाजा मामले में विधिक राय लेने की भी बात चल रही है। साथ ही जांच आगे बढ़ाने के लिए पीड़िता से संपर्क की कोशिश की जा रही है। वहीं, कोतवाली प्रभारी प्रवीण कोश्यारी ने बताया कि दिल्ली में केस दर्ज कराने के बाद पीड़िता ने मेडिकल परीक्षण नहीं कराया। इस संबंध में उसने बाकायदा लिखित में भी दिया है।