संयुक्त नागरिक संगठन की ओर से आयोजित बैठक में दून की कई सामाजिक संस्थाओं और अभिभावक संगठनों ने प्राइवेट स्कूलों की मनमानी के खिलाफ कड़ा कानून बनाने की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि उत्तर प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखंड में भी स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय शुल्क अधिनियम जैसा सख्त कानून लागू किया जाना चाहिए। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि निजी स्कूलों व व्यावसायिक शिक्षण संस्थाओं की ओर से शिक्षण शुल्क, परीक्षा शुल्क, यूनिफॉर्म, किताबें, स्मार्ट क्लाॅस, कंप्यूटर, विकास शुल्क आदि के नाम पर आर्थिक शोषण किया जा रहा है। कहा कि ये सभी शुल्क मूल शिक्षण शुल्क में समाहित होने चाहिए। 2006 में तैयार किया गया उत्तराखंड गैर सहायता प्राप्त निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्थान अधिनियम आज तक लागू नहीं हो सका। एनएपीएसआर के आरिफ खान ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2011 के उल्लंघन पर भी शिक्षा विभाग दंडात्मक कार्रवाई करने में असहाय रहा है। बाल अधिकार संरक्षण आयोग व बाल कल्याण समिति भी छात्रों के शोषण को रोकने में विफल रही है। इस दौरान राज्यपाल व मुख्य सचिव से ज्ञापन भेजने और मुलाकात का निर्णय भी लिया गया। इस मौके पर डाॅ. भवतोश शर्मा, ठाकुर शेर सिंह, जगदीश बावला, सुशील त्यागी, खुशवीर सिंह आदि मौजूद रहे। मा.सि.रि.